इराक में संसदीय चुनाव 2022 में होना था। लेकिन इस साल सरकार विरोधी बड़े जन प्रदर्शनों के कारण संसद समय से पहले भंग कर दी गई। लेकिन इस चुनाव के दौरान मतदान प्रतिशत बहुत कम रहा। चुनाव नतीजों के एलान के बाद अल-सदर ने एक टीवी प्रसारण में दावा किया कि उनके गुट को जनादेश मिला है और अब वे ऐसी सरकार बनाएंगे, जो विदेशी प्रभाव से मुक्त रहते हुए काम करेगी। अल-सदर के इस बयान को ईरान के खिलाफ समझा गया है। अल-सदर की छवि राष्ट्रवादी की है और वे इराक के मामलों में अमेरिका के साथ-साथ ईरान के हस्तक्षेप का भी विरोध करते रहे हैं। हालांकि यह भी सच है कि जब अल-सदर अमेरिकी फौज को इराक से निकालने की जंग लड़ रहे थे, तब उन्होंने बार-बार ईरान में पनाह ली थी।
चुनाव नतीजों के मुताबिक इस बार कई ऐसे उम्मीदवारों को सफलता मिली है, जिनका राजनीतिक करियर 2019 से देश में चले सरकार विरोधी प्रदर्शनों से ही शुरू हुआ है। उधर कुर्द समुदाय की पार्टियों को 61 सीटें मिली हैं। इनमें कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली 32 सीटें शामिल हैं। ये पार्टी इराक के कुर्द इलाकों की स्वायत्तता की समर्थक रही है।
ईरान समर्थक शिया गुटों को इस बार 2018 की तुलना में कम सीटें मिली हैँ। पिछली संसद के दौरान इन्हीं गुटों की सरकार थी। उधर सुन्नी गुटों को 38 सीटें मिली हैँ। विश्लेषकों के मुताबिक अनेक मजहबी पंथों और समुदायों में वाले इराक में 2003 के बाद से इसी तरह का बंटा हुआ जनादेश आता रहा है। इसलिए हर बार सरकार बनने में वक्त लगा है। इस बार के चुनाव की खास बात यह है कि मुकतदा अल-सदर सबसे प्रभावशाली नेता बन कर उभरे हैँ।