ये सारा मसला तब और भड़क गया, जब अफगान सरकार ने ईरान से लगी सीमा के पास हेलमांद नदी पर एक बांध बनाया। इस कमाल खान डैम का उद्घाटन इसी साल मार्च में हुआ। ईरान ने तब कहा था कि इस बांध के कारण हेलमांद नदी में पानी का प्रवाह काफी घट जाएगा। ईरानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक जब से तालिबान सत्ता में आया है, कमाल खान डैम से अधिक मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान ने संभवततया ये रुख ईरान का समर्थन पाने के लिए अपनाया है। लेकिन पूर्व हमीद करजई सरकार में अफगानिस्तान के जल प्राधिकरण के प्रमुख रह चुके मोहम्मद बशीर ने डायचे वेले से कहा कि तालिबान को पर्यावरण की समझ नहीं है। उन्होंने कहा- ‘अभी तालिबान उन लोगों के साथ मिल कर काम करना चाहता है, जिसे वह अपना वैचारिक करीबी समझता है। लेकिन अफगानिस्तान गंभीर संकट में है और उसके पास संसाधनों की बेहद कमी है।’
फरवरी 2021 में अफगानिस्तान और ईरान के बीच हेलमांद नदी के जल के बंटवारे पर एक सहमति बनी थी। लेकिन जानकारों का कहना है कि जब अफगानिस्तान खुद पानी का संकट झेल रहा है, तब तालिबान उस सहमति पर कैसे कायम रहेंगे, यह देखने की बात होगी। जबकि यह साफ है कि ईरान के साथ अफगानिस्तान का रिश्ता कैसा रहेगा, यह जल समझौते पर अमल से ही तय होगा।