दोनों पक्षों में सहमति बनने के बाद ग्रोसी और इस्लामी ने तेहरान में एक साझा प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। उसमें ग्रोसी ने कहा- ‘आज हम बहुत ठोस नतीजा हासिल करने में सफल रहे हैं। इसके तहत ईरान के परमाणु केंद्रों पर आईएईए के उपकरण लगे रहेंगे। ये उपकरण आईएईए और बाकी दुनिया को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में ठोस सूचना के लिए अनिवार्य हैं।’
इसके पहले बातचीत टूटने की आशंका गहराने पर ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को फोन किया था और उनसे वार्ता को बचाने की अपील की थी। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ईरान और आईएईए के बीच सहमति बन जाने से सारी दुनिया को राहत मिली है। वरना, इस पूरे इलाके में टकराव एक नई ऊंचाई तक पहुंच जाता।
ये व्यवस्था पहले से है कि ईरान के परमाणु केंद्रों पर आईएईए के कैमरों से होने वाली रिकॉर्डिंग के वीडियो ईरान अपने पास रखता है। आईएईए के निरीक्षक ईरान जाकर उन वीडियो की समीक्षा करते हैं। तनाव इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि ईरान ने कहा कि अगर जब तक 2015 का समझौता दोबारा लागू नहीं हो जाता, वह रिकॉर्डिंग रोक देगा। अब ये संभावना टल गई है।