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Pakistan: पाकिस्तान में प्रमुख ब्याज दरें 24 साल के उच्चतम स्तर, कंगाली की कगार पर भारत का पड़ोसी

Sun, 27 Nov 2022 11:53 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, इस्लामाबाद

सार

ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पाकिस्तान ने अपने नागरिकों के लिए एक नई समस्या पैदा कर दी है। वहीं बैंक के मुताबिक महंगाई पर काबू पाने के लिए पाकिस्तान ने प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social media
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विस्तार
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पाकिस्तान अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। महंगाई को लेकर जनता सरकार के खिलाफ सड़कों पर है तो गरीबी और भुखमरी भी अपने चरम पर है। वहीं पाकिस्तान की प्रमुख बैकों में से एक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए शुक्रवार को अपनी ब्याज दरों को 16 फीसदी तक बढ़ा दिया है। इस कारण प्रमुख ब्याज दरें 24 साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई हैं।

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ब्याज दरों में बढ़ोतरी से पाकिस्तान ने अपने नागरिकों के लिए एक नई समस्या पैदा कर दी है। वहीं बैंक के मुताबिक महंगाई पर काबू पाने के लिए पाकिस्तान ने प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। सरकार पहले ही पहली तिमाही के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक गई है और राजस्व बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के दबाव में है क्योंकि पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा भंडार में काफी कमी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अगर राजकोषीय घाटे में कमी करनी है तो सरकार के पास एकमात्र विकल्प है कर लगाना। वहीं डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्याज दर में बढ़ोतरी सरकार को भारी पड़ेगी। एसबीपी ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए अपनी नीतिगत दर को 100 आधार अंकों से बढ़ाकर 16 प्रतिशत कर दिया है लेकिन उच्च ब्याज दरों के अन्य पहलुओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
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स्थानीय अखबार, डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, उच्च ब्याज दर में बढ़ोतरी से व्यापार और उद्योग को नाराज कर दिया है। व्यापारियों का कहना है इस आश्चर्यजनक कदम से व्यापार करने की लागत बढ़ेगी, इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि व्यापार करने की बढ़ी हुई लागत आर्थिक विकास को गंभीर रूप से बाधित करेगी। सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2012 में लगभग 6 प्रतिशत के मुकाबले वित्त वर्ष 23 में अर्थव्यवस्था 2 प्रतिशत के आसपास बढ़ सकती है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कार्यकारी भत्ते का भुगतान न करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया
विदेश मंत्रालय और सूचना और प्रसारण मंत्रालय सहित कुछ और मंत्रालयों के अधिकारियों और निम्न कैडर समूहों ने कार्यकारी भत्ते के भुगतान न करने पर विरोध करने का फैसला किया है। अलग-अलग मंत्रालयों के जिन कर्मचारियों को कार्यकारी भत्ता प्राप्त नहीं हुआ है, वे अगले हफ्ते से पाकिस्तान सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अर्थशास्त्री समूह और योजना मंत्रालय के तकनीकी कैडर पिछले कुछ हफ्तों में होने वाली महत्वपूर्ण आधिकारिक बैठकों का बहिष्कार कर रहे हैं। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, विदेश कार्यालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, स्थापना प्रभाग के एमएस विंग और कैबिनेट प्रभाग के अधिकारियों ने भी अगले सप्ताह से वित्त मंत्रालय के सामने एक संयुक्त विरोध रैली का हिस्सा बनने का फैसला किया है।

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