द्वितीय विश्य युद्ध के दौरान बर्लिन के पास एक बंदी शिविर में नाजी गार्ड के रूप में सेवा देने वाले 100 वर्षीय गार्ड पर हजारों की हत्या में सहायक होने के आरोप में मुकदमा चल रहा है। उस पर 3,518 मामलों को लेकर हत्या में सहायक होने के आरोप हैं। इस गार्ड की अधिक उम्र होने के बावजूद उस पर मुकदमा चलाने के लिए अदालत ने उसे फिट बताया है।
अदालत ने इस 100 वर्षीय संदिग्ध गार्ड के नाम का खुलासा नहीं किया है लेकिन उसका मुकदमा न्यूरुपिन प्रांत की अदालत से ब्रैंडेनबर्ग में स्थानांतरित कर दिया गया है। अदालत ने पाया कि 1942 से 1945 के बीच नाजी पार्टी के अर्धसैनिक विंग में यह गार्ड सूचीबद्ध रहा और बंदी शिविर में कई लोगों को यातनाएं दीं व कई की मौत में मददगार रहा। मारे गए लोगों की संख्या का अनुमान अलग-अलग है।
गिनी के सैन्य नेता ने घोषणा की है कि वरिष्ठ नागरिक सेवक मोहम्मद बेवोगुई उस सरकार में प्रधानमंत्री के बतौर काम करेंगे जो पिछले माह तख्तापलट के बाद पश्चिम अफ्रीकी देश को नागरिक शासन में बदल रही है।
हाल ही में अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले कर्नल मामाडी डोंबोया ने सरकारी टीवी पर यह घोषणा की। 68 वर्षीय बीवोगुई ने विकास के क्षेत्र में काफी काम किया है जबकि उनके करियर का बड़ा हिस्सा संयुक्त राष्ट्र में रहा है। उन्होंने कृषि विकास व खाद्य के लिए यूएन के अंतरराष्ट्रीय कोष में कई पदों पर काम किया।
रेड क्रेसेंट के कर्मी अब्दुल रहमान अल-सादान को सऊदी अरब सरकार की टि्वटर पर आलोचना के जुर्म में 20 वर्ष कैद की सजा बहाल रखी गई है। कैलिफॉर्निया में रह रहीं अल-सादान की बहन अरीज ने बताया, इस वर्ष अप्रैल में रियाद की अदालत ने उनके भाई को 20 वर्ष कैद की सजा सुनाई थी। अपील में अदालत ने सजा बरकरार रखने के साथ 20 का यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है। यानी 37 वर्षीय अल-सादान 40 वर्ष तक सजा भुगतेंगे।
अचानक गायब हो गए
अरीज बताती हैं कि उनका भाई मार्च 2018 में अचानक गायब हो गया था, बस इतना पता चला था कि सादी पोशाक में आए कुछ सुरक्षाकर्मी साथ ले गए। दो वर्ष तक उन्हें अल-सादान की खबर नहीं मिली, फिर फरवरी 2020 में पता चला कि उन्हें सरकार ने बंदी बना रखा है।