मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच, चीनी पनडुब्बी और युद्धपोत संभावित युद्धाभ्यास के लिए पाकिस्तान की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय नौसेना अपने पी-8आई निगरानी विमानों और एमक्यू-9बी ड्रोन की मदद से इन गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रही है। बता दें कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसैनिक गतिविधियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखती है। इस इलाके को विश्व स्तर पर भारत की जिम्मेदारी का क्षेत्र माना जाता है।
चीनी नौसेना के तीन युद्धपोत और टैंकर
हिंद महासागर में सैन्य गतिविधियों के बारे में सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, "एक विध्वंसक और फ्रिगेट के साथ चीनी नौसेना के तीन युद्धपोत एक टैंकर सहित फारस की खाड़ी क्षेत्र में हैं। समुद्री अभ्यास के लिए पाकिस्तानी नौसेना के इसमें शामिल होने की संभावना है।
हिंदमहासागर में हलचल
तीनों युद्धपोत मई 2023 से 44वीं एंटी-पाइरेसी एस्कॉर्ट फोर्स (APEF) का हिस्सा थे। अब उन्होंने अदन की खाड़ी में 45वीं एपीईएफ को एंटी-पाइरेसी भूमिका की जिम्मेदारी सौंप दी है। 45वें APEF ने अक्टूबर में भारतीय समुद्री क्षेत्र (IOR) में हिंद महासागर क्षेत्र में प्रवेश किया और तब से वहीं है।
अमेरिका की निगरानी की योजना, चीन-पाक एकसाथ!
सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने वाली संबंधित एजेंसियों को संदेह है कि चीनी और पाकिस्तानी युद्धपोत फारस की खाड़ी के उन क्षेत्रों की तरफ बढ़ सकते हैं, जहां से अमेरिका पर नजर रखी जा सके। इस्राइल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिकी नौसेना की इस क्षेत्र में तैनाती की गई है। माना जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान करीबी सहयोगी होने के कारण अमेरिका की निगरानी कर सकते हैं।
मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास P-8I पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान
चीनी युद्धपोतों में एक पनडुब्बी सपोर्ट वेसल चांग दाओ (एएसआर 847) के साथ एक सॉन्ग क्लास पनडुब्बी भी शामिल हो गई है। भारतीय नौसेना इन जहाजों की बारीकी से निगरानी कर रही है। भारतीय नौसेना को मलक्का जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है और वह अपने P-8I पनडुब्बी रोधी युद्धक विमानों और प्रीडेटर ड्रोन को बड़े पैमाने पर उड़ाती है।
ड्रोन और अन्य मशीनों की मदद से निगरानी
खबरों के अनुसार, पाकिस्तानी नौसेना के साथ युद्धाभ्यास नवंबर के मध्य या अंत में आयोजित होने की योजना है। इसमें पाकिस्तान की नौसेना सक्रिय रूप से भागीदार होगी। भारतीय नौसैनिकों ने ड्रोन और अन्य निगरानी यंत्रों की मदद से सितंबर के मध्य से आईओआर में एक चीनी अर्ध-सैन्य अनुसंधान पोत, शि यान 6 को भी ट्रैक किया है।
फारस और अदन की खाड़ी में भारतीय नौसेना
सूत्रों ने कहा कि अनुसंधान पोत वर्तमान में श्रीलंकाई ईईजेड में संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहा है। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना की फारस की खाड़ी के साथ-साथ अदन की खाड़ी में भी बड़ी उपस्थिति है। इस क्षेत्र में विरोधियों की किसी भी गतिविधि के खिलाफ भारतीय नौसेना निगरानी रखती है।