सूडान की सेना और अर्धसैनिक बल- रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच शनिवार को शुरू हुई जंग दूसरे दिन भी जारी रही। इस संघर्ष में अब तक 61 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 670 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। वहीं, आरएसएफ ने दावा किया है कि राष्ट्रपति भवन, सेना प्रमुख का निवास, राजकीय टीवी केंद्र, खार्तूम एयरपोर्ट के साथ ही मेरावी, अल फशर और पश्चिमी दारफूर उसके कब्जे में है।
जबकि, सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल बुरहान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा, आरएसएफ के लोग जगह-जगह छिपकर हमले कर रहे हैं, सेना उन्हें समर्पण करने का मौका देती है, अगर समर्पण नहीं किया, तो आरएसएफ के आखिरी लोगों तक को खत्म करने तक सेना नहीं रुकेगी। वहीं, आरएसएफ के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान डागलो ने कहा कि बुरहान एक झूठा और अपराधी व्यक्ति है, जिसकी बात किसी को नहीं सुननी चाहिए।
असल में इस संघर्ष के पीछे आरएसएफ का सेना में विलय का एक प्रस्ताव है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समर्थन के बाद सूडान के राजनीतिक दलों ने मंजूरी दी थी। लेकिन, सेना की तरफ से इस समझौते पर हस्ताक्षर में देरी की जा रही थी। इसी प्रस्ताव पर मतभेदों की वजह से आरएसएफ और सेना के बीच महीने भर से तनाव जारी था। सूडान में लोकतंत्र बहाली के प्रयासों को इस हिंसक झड़प से बड़ा झटका लगा है। अमेरिका, सऊदी अरब और यूएई के विदेश मंत्रियों ने सूडान के हालात को लेकर आपात चर्चा की है। वहीं, भारत सहित तमाम देशों ने दोनों पक्षों से शांति स्थापना की अपील की है।
सेना कर रही हवाई हमले, आरएसएफ की तरफ से तोपों का इस्तेमाल
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सेना जहां हवाई हमले कर रही है, आरएसएफ की तरफ से भी तोपों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राधानी खार्तूम के अलावा न्याला, अल ओबीद, अल फशर और ओमदुरमान में भी संघर्ष जारी है। शनिवार को आरएसएफ ने आरोप लगाया था कि सेना ने दक्षिण खार्तूम स्थित बल के अड्डे पर हमला किया है। वहीं, सेना का दावा है कि आरएफएफ ने खार्तुम स्थिति उसके मुख्यालय पर हमला बोला था। फिलहाल, दोनों तरफ से टैंक और तोप जैसे भारी हथियार इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसकी वजह से राजधानी खार्तूम में भारी नुकसान हुआ है। सूडानी डॉक्टरों के संघ का दावा है कि हिंसा में 61 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 670 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।