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असहमत: म्यांमार को लेकर यूएनजीए प्रस्ताव पर भारत का मतदान से किनारा, कही यह बात

Sat, 19 Jun 2021 11:55 AM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला

सार

म्यांमार पर पांच सूत्रीय सहमति और आसियान की पहल का संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत तिरुमूर्ति ने स्वागत किया। हालांकि,तिरुमूर्ति ने म्यांमार में हिरासत में लिए गए नेताओं को जल्द रिहाई की मांग की है। साथ ही शांति बहाली की अपील की है। 
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टीएस तिरुमूर्ति, भारतीय राजदूत, संयुक्त राष्ट्र महासभा - फोटो : ANI
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विस्तार
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म्यांमार पर पांच सूत्रीय सहमति और आसियान की पहल का संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत  ने स्वागत किया। म्यांमार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि  हम कानून के शासन को बनाए रखने और हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की अपील करते हैं। हालांकि, भारत ने म्यांमार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव पर वोटिंग से खुद को अलग रखा।  भारत का कहना है कि प्रस्तावित मसौदे से यह असहमत है और पड़ोसी होने के नाते रचनात्मक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगा हुआ है। 

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भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि म्यांमार की स्थिति पर भारत की स्थिति स्पष्ट और सुसंगत रही है। म्यांमार में कमजोर हुए लोकतंत्र चिंता का विषय है। देश में जारी हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं। हम अंततराष्ट्रीय समुदायों से भी अपील करते हैं कि वहां पर जल्द से जल्द शांति बहाल हो।

भारत समेत अन्य देशों ने वोटिंग से किया किनारा
गौरतलब है कि UNGA ने म्यांमार पर एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया था कि 8 नवंबर, 2020 के आम चुनाव के नतीजों पर आम लोगों को म्यांमार के सशस्त्र बलों को सम्मान करना चाहिए ताकि देश में इमरजेंसी के हालात खत्म हों और लोगों के मानवाधिकार को सम्मान मिल सके। इस मसौदे पर 119 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया। वहीं बेलारूस ने असहमतिजताई। इसके अलावा भारत, चीन और रूस समेत 35 अन्य देशों ने वोटिंग से किनारा कर लिया।  

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सत्ता पर सेना का कब्जा
बता दें कि साल 2015 में आंग सान सू की की अगुवाई में उनकी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव जीत लिया। ये म्यांमार के इतिहास में 25 साल में हुआ पहला चुनाव था, लेकिन सरकार में सेना का वर्चस्व ज्यादा होने से बाद में सेना ने सत्ता पर कब्जा जमा लिया। 

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