विदेश सचिव ने यह भी कहा कि बीते माह भारत की अध्यक्षता में परिषद द्वारा स्वीकृत यूएनएससी प्रस्ताव में संकटग्रस्त देश से बाहर निकलना चाह रहे अफगानों और विदेशी नागरिकों की सुरक्षित निकासी की भी अपेक्षा की गई है।
भारत का कहना है कि दुनिया को अफगानिस्तान संकट से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के उस प्रस्ताव के आधार पर निपटना चाहिए, जिसमें अफगान जमीन का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न होने देने की मांग की गई है।
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एक ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने कहा, प्रस्ताव 2593 में यूएनएससी द्वारा प्रतिबंधित आतंकियों का विशेष उल्लेख किया गया है। इसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी भी शामिल हैं।
शृंगला का कहना है, सभी मानते हैं कि अफगानिस्तान में महिला, अल्पसंख्यक अधिकारों समेत मानवाधिकारों को कायम रखने और वहां समावेशी, वार्ता आधारित राजनीतिक समझौते के लिए सभी पक्षों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
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उन्होंने कहा, भारत को अफगान संकट से निपटने पर वैश्विक समुदाय के संयुक्त और उत्तरदायी बने रहने की उम्मीद है।
शृंगला ने कहा, लंबे समय से अफगानों की सहायता और वहां निवेश के चलते भारत की साख बढ़ी है। साथ ही दोनों देशों के सभ्यतागत बंधन को मजबूत किया है। भारत ने अफगानिस्तान में क्षमता निर्माण में योगदान दिया है। विकास सहायता कार्यक्रम के तहत हमने वहां प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटियां बनाई हैं। 65 हजार से ज्यादा अफगान छात्र भारत में पढ़े हैं। विदेश सचिव ने कहा, अफगानों के प्रति हमारा यह दोस्ताना दृष्टिकोण आगे भी जारी रहेगा।