राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने शनिवार को यहां फ्रांस के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्षिक रणनीतिक बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व किया। भारत-फ्रांस रणनीतिक वार्ता की 35वीं बैठक के अवसर पर डोभाल ने फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां येव्स ली द्रयां, रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पर्ली, फांसीसी राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों के कूटनीतिक सलाहकार इमैन्युएल बोन और राष्ट्रपति के मुख्य सैन्य सलाहकार एडमिरल ज्यां फिलिप रोलैंड के साथ वार्ता की।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और खुली आवाजाही के महत्व पर बात हुई
फ्रांसीसी विदेश मंत्री के साथ बातचीत में कानून के शासन के तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त और खुली आवाजाही के महत्व पर बात हुई। नई दिल्ली स्थित फ्रांसीसी दूतावास ने एक बयान जारी कर बताया कि द्रयां ने दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु ऊर्जा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने की जरूरत भी बताई। बयान में कहा गया है कि रोम में फ्रांसीसी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत की पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री द्रयां ने फ्रांस और भारत के बीच आपसी विश्वास के महत्व को रेखांकित किया।
पेरिस स्थित भारतीय दूतावास ने भी इस बैठक के बारे में बयान जारी कर बताया कि फ्रांस ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में एक स्थानीय ताकत होने के नाते अपनी प्रतिबद्धता जताई है और हिंद प्रशांत रणनीति के एक बड़े स्तंभ के रूप में भारत के साथ साझेदारी बल दिया है।
बैठक के दौरान एनएसए डोभाल ने कहा कि फ्रांस भारत का प्रमुख वैश्विक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र का साझेदार है। दोनों देशों ने पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच हुई बातचीत से सामने आए विजन को दोहराते हुए ये माना है कि उनकी साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर और रणनीतिक स्वायत्ता, कानून के शासन, बहुध्रुवीयता और बहुपक्षीयता के साझा विश्वास के बूते हिंद प्रशांत में स्थायित्व, सुरक्षा और शांति को कायम रखने के लिए बहुत जरूरी है।
फ्रांसीसी एनएसए से अफगानिस्तान से आतंकी खतरे पर चर्चा
फ्रांसीसी एनएसए इमैल्युएल बोन के साथ डोभाल ने अफगानिस्तान से भविष्य में आतंकी खतरे को लेकर भी चर्चा की। इसके अलावा अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया में भविष्य की चुनौतियों पर भी विचार विमर्श किया। इसके अलावा दोनों एनएसए ने समुद्र, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष क्षेत्र की चुनौतियों पर भी बात हुई। दोनों पक्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तथा संयुक्त राष्ट्र के अन्य मंचों पर मजबूत साझेदारी पर भी एकमत थे।