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India-Thailand Ties: 'भारत-थाईलैंड के खतरे एक जैसे, पिछले 10 वर्षों में बढ़ा सैन्य सहयोग', भारतीय राजदूत बोले

Fri, 05 Jul 2024 08:46 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक

सार

10 साल पहले दोनों देशों में सुरक्षा को लेकर ऐसा सहयोग नहीं था, लेकिन अब पता चला है कि दोनों देशों के साझा खतरे हैं और हमारे रणनीतिक हित भी साझा हैं। इसलिए हमने सैन्य स्तर पर बातचीत शुरू की है। तीनों सेनाओं के स्तर पर बैठकें हो रही हैं। 
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थाईलैंड में भारत के राजदूत - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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थाईलैंड में भारत के राजदूत नागेश सिंह ने कहा है कि भारत और थाईलैंड के साझा खतरे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग में तेजी आई है और उनके अधिकांश उद्देश्य भी साझा हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने स्टाफ स्तर पर और तीनों सशस्त्र बलों के बीच अधिक संवाद और अभ्यास शुरू किए हैं।नागेश सिंह ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में मानव तस्करी और अनियमित मछली पकड़ने के मुद्दे भी हैं।
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पिछले 10 वर्षों में बढ़ा है रक्षा सहयोग
भारतीय राजदूत ने कहा, दोनों देशों में खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के स्तर पर सहयोग बढ़ा है, लगातार बैठकें हो रही हैं। 10 साल पहले दोनों देशों में सुरक्षा को लेकर ऐसा सहयोग नहीं था, लेकिन अब पता चला है कि दोनों देशों के साझा खतरे हैं और हमारे रणनीतिक हित भी साझा हैं। इसलिए हमने सैन्य स्तर पर बातचीत शुरू की है। तीनों सेनाओं के स्तर पर बैठकें हो रही हैं। भारतीय राजदूत ने कहा, 'हम सिंगापुर, थाईलैंड के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में SITMEC जैसे कुछ बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में भी भाग लेते हैं।' भारत-थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री का 13वां संस्करण 1-15 जुलाई को थाईलैंड के टाक प्रांत में फोर्ट वाचिराप्रकन में आयोजित किया जा रहा है।

भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को थाईलैंड भेजने से मिला कूटनीतिक फायदा

भारत के थाईलैंड में राजदूत नागेश सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को थाईलैंड भेजना कूटनीति के लिहाज से बेहद खास कदम रहा। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा कदम था, जो कूटनीति के इतिहास में सबसे अहम है और इससे थाईलैंड के लोगों में भारत के प्रति अच्छी सोच बनी है। बता दें कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष और उनके दो शिष्यों के अवशेष इस साल फरवरी से मार्च के बीच थाईलैंड के चार शहरों में प्रदर्शित किए गए थे, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी थी। नागेश सिंह ने कहा कि करीब 42 लाख लोग भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट करने आए। उन्होंने कहा कि लोग आज भी इसके लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। 

थाईलैंड के उपमठाधीश देबवज्राचार्य बोले-हमने भारत से ही बौद्ध धर्म को अपनाया
थाई राजदूत के अलवा वाट फो के उप-मठाधीश देबवज्राचार्य ने थाई नागरिकों की तरफ से थाईलैंड में गौतमबुद्ध के अवशेषों की प्रदर्शनी के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहा है। उन्होंने कहा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया यह कदम थाई समुदाय के साथ गहराई से जुड़ गया है। देबवज्राचार्य ने अवशेषों के महत्व पर जोर देते हुए कहा, थाई लोगों की ओर से, हम प्रधानमंत्री मोदी के आभारी हैं, जिन्होंने बौद्ध अवशेषों को थाईलैंड भेजा।  उन्होंने भारत-थाईलैंड के लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर कहा, यह आयोजन दोनों पक्षों के लिए अच्छी दोस्ती का प्रतीक है। उन्होंने याद दिलाया कि हमने भारत से ही बौद्ध धर्म को अपनाया है। सम्राट अशोक ने नौ भिक्षुओं को जब सुवर्णभूमि भेजा, तो थाईलैंड ने बौद्ध धर्म को राष्ट्रीय धर्म के रूप में अपनाया। वाट फो के उप-मठाधीश ने थाईलैंड और भारत के बीच स्थायी सांस्कृतिक संबंधों के कई प्रमाण जुड़े हुए हैं। इससे पहले, भारत में थाईलैंड के राजदूत पट्टारत होंगटोंग ने भी थाईलैंड में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया। 
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म्यांमार संकट ने बढ़ाया मानव तस्करी का खतरा

म्यांमार संकट का असर पड़ोसी देशों भारत और थाईलैंड पर भी पड़ रहा है। दरअसल म्यांमार की सेना और विद्रोही समूहों में जारी संघर्ष अब केंद्र के नियंत्रण से बाहर हो रहा है। हालात का आपराधिक गैंग्स भी फायदा उठाने में जुटे हैं और म्यांमार में अपराध, साइबर फ्रॉड, अवैध जुए की समस्या बढ़ रही है। भारत के थाईलैंड में राजदूत नागेश सिंह ने कहा कि हालात बिगड़ने से म्यांमार में मानव तस्करी का खतरा भी बढ़ा है।  
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