भारत समेत छह अन्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र की मान्यता देने वाले प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर छह मानवाधिकार समूहों को बड़ा झटका दिया है। प्रस्ताव अमेरिका द्वारा लाया गया है। इस प्रस्ताव में इन छह समूहों को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद में विशेष सलाहकार का दर्जा देने की मांग की गई थी।
203 मानवाधिकार समूहों की सिफारिश की गई थी
54 सदस्यीय आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की बैठक में, गैर-सरकारी संगठनों की समिति ने विशेष सलाहकार स्थिति के लिए 203 मानवाधिकार समूहों की सिफारिश की। जिनमें छह अन्य गैर-सरकारी संगठनों, जिसमें विकिपीडिया चलाने वाली संस्था भी शामिल है। इन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रस्तावित एक मसौदे में सूची में जोड़ा गया था। लेकिन भारत समेत छह देशों ने इनके खिलाफ मतदान कर बड़ा झटका दे दिया।
संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट पर रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधि द्वारा प्रस्तुत परिषद के साथ सलाहकार का दर्जा प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों की सूची पर मसौदा प्रस्ताव ने एक संक्षिप्त हलचल पैदा की। कुल 36 देशों द्वारा प्रायोजित मसौदा प्रस्ताव ने समिति द्वारा प्रस्तावित सूची में छह अतिरिक्त गैर-सरकारी संगठनों की सिफारिश की।
प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने किया मतदान
इस प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने मतदान किया, भारत समेत सात ने इसके खिलाफ मतदान किया। विरोध में मतदान करने वाले देशों में चीन, भारत, कजाखस्तान, निकारागुआ, नाइजीरिया और जिम्बाब्वे शामिल थे। मतदान प्रक्रिया से 18 सदस्य देश दूर रहे। रूस ने इन छह मानवाधिकार समूहों को परामर्शदाता का दर्जा देने का विरोध किया। रूस, चीन और अन्य सरकारों ने इनके आवेदन कई वर्षों से रोके हुए थे।
विकीपीडिया समेत 6 समूहों को यूएन की मान्यता
विकिपीडिया फाउंडेशन समेत 6 मानवाधिकार संगठनों को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता मिल गई है। वे अब आर्थिक विकास और समाजिक मुद्दों पर अपनी बात रख सकेंगे और चर्चा में भाग ले सकेंगे। छह संगठनों में बेलारूस की हेलसिंकी कमेटी, स्वीडन की डायकोनिया, इटली की नो पीस विदआउट जस्टिस, एस्टोनिया इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन राइट्स व दो अमेरिकी समूह सीरियन-अमेरिकन मेडिकल सोसायटी तथा विकीमीडिया फाउंडेशन शामिल हैं।