भारत और यूरोपीय संघ के राजनयिक संबंधों को 60 साल पूरे हो गए। इस मौके पर 'प्रवास और आवाजाही पर उच्च स्तरीय वार्ता' (6th HLDMM) का आयोजन किया गया। इसमें साझा एजेंडे के सफल क्रियान्वयन पर संतोष जताया गया।
भारत व यूरोपीय संघ के बीच इस उच्च स्तरीय संवाद की वाणिज्य दूत व पासपोर्ट तथा वीजा मामलों के सचिव औसाफ सईद और यूरोपीय आयोग के महानिदेशक (प्रवास तथा गृह मामले) मोनिक पारियात ने सह अध्यक्षता की। एचएलडीएमएम वार्ता 27 अक्तूबर को ब्रुसेल्स में हुई। इसमें दोनों पक्षों ने प्रवास और आवाजाही से संबंधित साझा एजेंडे के अमल पर संतोष जताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह वार्ता दोनों पक्षों के संबंधों में नए आयाम लाएगी।
भारत-यूरोपीय संघ के संबंध 1960 के दशक की शुरुआत से हैं। भारत ने सबसे पहले यूरोपीय आर्थिक समुदाय, जो बाद में ईयू बना, के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। 1994 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सहयोग का समझौता द्विपक्षीय संबंधों को व्यापार से परे ले गया और इसे आर्थिक सहयोग में बदला। वर्ष 2004 में हेग में 5वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में इसे रणनीतिक साझेदारी का रूप दिया गया और साझा कार्ययोजना बनाई गई। इसका मकसद परस्पर संवाद को मजबूत करना, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों में परामर्श तंत्र स्थापित करना, व्यापार और निवेश बढ़ाना तथा दोनों समुदायों के लोगों की संस्कृतियों को एक साथ लाना है।
विदश मंत्रालय ने कहा कि ताजा वार्ता में अनियमित प्रवास की रोकथाम, सुरक्षित और व्यवस्थित और नियमित प्रवास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। प्रतिभाशाली पेशेवरों, विद्यार्थियों और कुशल श्रमिकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए सहयोग पर भी चर्चा की गई।