हिंद-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ते आपसी रणनीतिक सहयोग के बीच भारत और अमेरिका समुद्र में सुरक्षा व शक्ति बढ़ाने के लिए नए रास्तों की तलाश कर रहे हैं।
नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने अमेरिका में चार दिवसीय दौरे पर इसे प्रमुखता दी। वे 19 से 22 सितंबर तक अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक-शक्ति परिसंवाद (आईएसएस) में शामिल हुए। नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने बताया कि यह दौरा दोनों देशों की नौसेनाओं में बातचीत व द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और हिंद प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न साझेदारों के साथ भी बातचीत का महत्वपूर्ण अवसर बना। रोड आईलैंड में न्यूपोर्ट स्थित अमेरिकी नौसैनिक युद्ध महाविद्यालय में इस आयोजन में समान सोच रखने वाले देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं। उन्होंने खुले व नियम आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझे नजरिया के लिए सहयोग बढ़ाने पर संवाद किए। भारतीय नौसेना प्रमुख ने आईएसएस के बाहर भी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, फिजी, इस्राइल, इटली, जापान, केन्या, पेरू, सऊदी अरब, सिंगापुर और यूनाइटेड किंगडम के नौसेना प्रमुखों के साथ बैठक की। कमांडर मधवाल ने कहा कि यह विस्तृत बैठकें बताती हैं कि भारतीय नौसेना हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त, खुला व समावेशी बनाने के लिए दृढ़ हैं।
तकनीकी आधुनिकीकरण के बावजूद सैनिक असली ताकत
आईएसएस में नौसेना प्रमुख हरि कुमार ने नौसेना में मानव संसाधन प्रबंधन पर विस्तृत वक्तव्य दिया। भारत में अग्निपथ योजना, महिला सशक्तीकरण और नौसेना को जेंडर-न्यूट्रल बनाने के लिए उठाए कदमों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, मेरा दृढ़ विश्वास है कि तमाम तकनीकी आधुनिकीकरण के बावजूद अभी जो भविष्य हमें नजर आ रहा है, उसमें हमारे सैनिक ही हमारी असली सैन्य ताकत बने रहेंगे।
नौसैनिक युद्धाभ्यास पर भी बातचीत
अमेरिका के साथ नौसैनिक युद्धाभ्यासों पर भी दोनों देशों की नौसेनाओं ने बातचीत की। वे पूर्व में मालाबार, सी-ड्रैगन, रिमपैक और टाइगर ट्रायंफ जैसे द्विपक्षीय व बहुपक्षीय युद्धाभ्यासों में शामिल हो चुके हैं। रिमपैक यानी रिम ऑफ पेसिफिक एक्सरसाइज को दुनिया का सबसे बड़ा सामुद्रिक युद्धाभ्यास माना जाता है। इसे अमेरिकी नौसेना की हिंद-प्रशांत कमान ने आयोजित किया था।