पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान
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रेडियो पाकिस्तान ने अनाधिकारिक सूत्रों के हवाले से खबर दी कि चुनाव आयोग ने पीओके विधानसभा चुनाव के परिणाम जारी कर गिए हैं। इसमें पीटीआई ने जहां 25 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) को 11 सीटों पर सफलता मिली। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को छह सीटों पर जीत मिली। मुस्लिम कॉन्फ्रेंस (एमसी) और जम्मू-कश्मीर पीपल्स पार्टी (जेकेपीपी) को एक-एक सीट मिली है।
ऐसे में पीटीआई को अब बिना किसी अन्य पार्टी के सहयोग से सरकार बनाने के लिए बहुमत मिल गया है। यह पहली बार है कि पीटीआई पीओके में सरकार बनाएगी। पारंपरिक रूप से सत्ताधारी पार्टी ही यहां जीतती रही है। भारत गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने के फैसले के लिए पाक को फटकार लगा चुका है। भारत का कहना है कि सैन्य कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति बदलने के लिए किसी भी कार्रवाई का कोई कानूनी आधार नहीं है।
विपक्षी दलों ने खारिज किए चुनाव परिणाम
वहीं, पाकिस्तान के विपक्षी नेता पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी और पीएमएल-एन की उपाध्यक्ष मरयम नवाज ने पीओके विधानसभा चुनावों के परिणामों को खारिज किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पीटीआई ने धांधली करके इन चुनावों में जीत हासिल की है। बिलावल भुट्टो जरदारी ने दावा किया कि चुनाव आयोग चुनावी नियमों का उल्लंघन करने के मामलों में पीटीआई के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से नाकाम रहा है।
'आम आदमी को इमरान खान पर भरोसा'
सूचना और प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि पीटीआई की शानदार जीत बताती है कि आम आदमी प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में भरोसा करता है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि विपक्षी दलों को अपने नेतृत्व और राजनीति दोनों पर फिर से विचार करना चाहिए। पीओके के विभिन्न जिलों की 33 सीटों पर कुल 587 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा जबकि पाकिस्तान में बसे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों की 12 सीटें पर 121 प्रत्याशी मैदान में थे।
कुछ ऐसा है पीओके विधानसभा का गणित
बता दें कि पीओके विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं लेकिन इनमें से केवल 45 पर ही सीधे निर्वाचन होता है। इनमें से पांच सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं और तीन सीटें विज्ञान विशेषज्ञों के लिए हैं। वहीं, सीधे चुने जाने वाले 45 सदस्यों में से 33 सीटों पर पीओके के निवासी चुनाव लड़ सकते हैं और 12 सीटें उन शरणार्थियों के लिए तय की गई हैं, जो बीते वर्षों में कश्मीर से यहां आए थे और पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में बस गए हैं।