अमेरिकी करोड़पति जेफरी एपस्टीन और ब्रिटिश महिला गिलैन मैक्सवेल से जुड़े मामले में 150 से अधिक लोगों के नाम अगले साल सार्वजनिक किए जाएंगे। यह आदेश एक संघीय न्यायाधीश ने कथित तौर पर दिया है। बता दें, जिनके नाम सामने आने हैं, उनमें यौन शोषण पीड़ित, गवाह, एपस्टीन के कर्मचारी और इस मामले से जुड़े लोग शामिल हैं।
अगर नहीं करना चाहते नाम सार्वजनिक तो...
हालांकि, अगर यह लोग अपना नाम उजागर नहीं करना चाहते हैं तो ये न्यायाधीश लोरेटा ए. प्रेस्का के आदेश के खिलाफ एक जनवरी 2024 तक अपील कर सकते हैं। बता दें, एपस्टीन के मुकदमे में नामों का उल्लेख किया गया था।
यह है मामला
गौरतलब है, 2021 में, ब्रिटिश महिला गिलैन मैक्सवेल को किशोरियों को बहलाने-फुसलाने का दोषी ठहराया गया था। इन किशोरियों को बहला फुसला कर अमेरिकी करोड़पति और फायनेंसर जेफरी एपस्टीन के पास भेजा जाता था। अमेरिका की एक अदालत में करीब एक महीने तक चली सुनवाई के बाद इस फैसले ने 14 साल की उम्र में यौन शोषण का शिकार हुईं पीड़िताओं को न्याय दिलाया था।
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कुछ हिस्सों को रखा जाएगा गोपनीय
पिछले दिनों मामले से जुड़े कई अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने आए थे। अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 150 नामों में से तीन अभी भी सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। जिन तीन नामों को सील रखा जाएगा वो एपस्टीन से जुड़े नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश प्रेस्का ने कहा कि सुनवाई के कुछ हिस्सों को गोपनीय रखा जाएगा। इनमें उन लोगों के नाम है, जो यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थीं और अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहती हैं।
ब्रिटेन के प्रिंस का भी हाथ?
इस मामले से जुड़े प्रमुख नामों में से एक ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू हैं। इन्हें कथित तौर पर एपस्टीन के सह-साजिशकर्ताओं में से एक माना जाता था। हालांकि, बाद में यह बेगुनाह साबित हुए। इनका कहना था कि वह एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों के बारे में कुछ नहीं जानते थे।
साल 2019 में हुआ था मामला दर्ज
इस घटना का खुलासा चार महिलाओं ने किया था, जो 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क और न्यू मैक्सिको में एपस्टीन के महलनुमा घरों में यौन शोषण की शिकार हुई थीं। छह में से पांच मामलों में मैक्सवेल को साल 2021 में दोषी ठहराने से पहले न्यायाधीशों ने पूरे पांच दिनों तक विचार-विमर्श किया था। इन महिलाओं ने आरोप लगाया था कि एपस्टीन के पास भेजने के लिए मैक्सवेल उन्हें बहलाती-फुसलाती थी। पीड़ित महिलाओं ने न्याय पाने के लिए अदालतों में वर्षों तक लड़ाई लड़ी। एपस्टीन पर साल 2019 में यौन शोषण का एक मामला दर्ज हुआ था। गिरफ्तार किए जाने के लगभग एक महीने बाद एपस्टीन ने मैनहट्टन जेल की कोठरी में आत्महत्या कर ली थी।