निकाय चुनाव में मिली जीत से आंदोलनकारी उत्साहित हैं और वे फिर से सड़कों पर लौट आए हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती हैं वे प्रशासन पर दबाव बनाए रखेंगे। 25 वर्षीय छात्र फेलिक्स ने कहा, ‘हमने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया, लेकिन पुलिस बल का प्रयोग कर रही है।’ 27 साल के एक आंदोलनकारी ने कहा, ‘मैं हांगकांग प्रशासन को संदेश देना चाहता हूं कि यह खत्म नहीं हुआ है। हम पीछे नहीं हटेंगे।’
हांगकांग को आजाद कराने की अपील
इससे पहले रविवार सुबह सैकड़ों आंदोलनकारी हांगकांग में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च निकाला। उनके हाथों अमेरिकी झंडे थे। उन्होंने इस आंदोलन में उनका साथ देने के लिए अमेरिकी सांसदों का भी आभार जताया। आंदोलनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘थैंक्यू’ बोला। साथ ही हांगकांग को आजाद कराने की अपील की। संसद से पास हुए आंदोलनकारियों के समर्थन वाले विधेयक पर ट्रंप ने हस्ताक्षर किया था।
स्वतंत्र समिति बनाने पर विचार
आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग को लेकर छात्रों से लेकर आम लोगों में काफी गुस्सा है। वे चाहते हैं कि सरकार इस मामले की जांच के लिए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समिति गठित करे। इसको लेकर हांगकांग प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है और वह बैकफुट पर है। प्रशासन अब समिति गठित करने पर विचार कर रहा है। मुख्य सचिव मैथ्यू चेउंग ने कहा कि संकट से निपटने की समीक्षा करने के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जा सकती है।
चीन ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बेशेलेट पर उसके देश के आंतरिक मामलों में अनुचित तरीके से दखल देने का आरोप लगाया है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय में चीन के मिशन ने कहा कि बेशेलेट का ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में लेख एकदम गलत है और यह संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इस लेख में हांगकांग विशेष प्रशासन क्षेत्र की स्थिति पर अनुचित टिप्पणी की गई है और यह चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है।’ बेशेलेट ने शनिवार को प्रकाशित एक लेख में हांगकांग में पुलिस के अत्यधिक बल का इस्तेमाल करने के मामले में जांच की मांग की थी।