कराची के एक पत्रकार मुबाशिर जैदी ने ट्वीट किया, 'स्थानीय मौलवियों की अगुवाई में भीड़ ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में एक हिंदू मंदिर को नष्ट कर दिया। हिंदुओं ने मंदिर को बढ़ाने के लिए प्रशासन से अनुमति ली थी लेकिन मौलवियों ने भीड़ जमाकर मंदिर को नष्ट कर दिया। पुलिस-प्रशासन मूक दर्शक बने रहे।'
लंदन की मानवाधिकार कार्यकर्ता शमा जुनेजो ने ट्वीट किया, 'यह नया पाकिस्तान है! पीटीआई सरकार के शासन में खैबर पख्तूनख्वा के शहर करक में हिंदू मंदिर को नष्ट कर दिया गया। पुलिस ने भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रहे थे। एक शर्मनाक दिन, जो निंदा से भी परे है।
डेली टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की एक सुन्नी देवबंदी राजनीतिक दल जमीयत उलेमा-ए इस्लाम-फज्ल ने मंदिर के पास एक रैली का आयोजन किया था। जहां आक्रामक भाषण दिए गए और जिसके बाद आक्रोशित भीड़ मंदिर की ओर बढ़ चली जहां, मंदिर में जमकर तोड़-फोड़ की गई और आग लगा दी गई।
पाकिस्तान के मानवाधिकारों के लिए संघीय संसदीय सचिव लालचंद मल्ही ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए ऐसी असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कुछ समूह सक्रिय हैं, जिन्हें सरकार कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है। खान ने पूजा स्थलों की इस प्रकार की घटनाओं से रक्षा किए जाने का संकल्प लिया।
हिंदू समुदाय पेशावर के नेता हारून सरब दियाल ने कहा कि इमरान खान धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करते हैं लेकिन पाकिस्तान में ही अल्पसंख्यकों के पूजा स्थल महफूज नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'इस्लामी विचारधारा परिषद को इस घटना का संज्ञान लेना चाहिए।' एक आधिकारिक अनुमान के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 75 लाख हिंदू रहते हैं। हालांकि समुदाय के मुताबिक, देश में हिंदुओं की आबादी 90 लाख से ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि हिंदू समुदाय पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक तबका है।