हमास-इस्राइल के बीच जल रही जंग को करीब छह महीने से ज्यादा समय हो गया है। फिर भी युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच एक इस्राइली शोधकर्ता ने दावा किया है कि हिज्बुल्ला उत्तरी इस्राइल के गैलिली क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है। वहीं, इस्राइल में पढ़ रहे भारतीय छात्रों ने हमलों के बीच उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए नई दिल्ली में भारतीय दूतावास और अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस्राइल में कार्बनिक रसायन विज्ञान में पीएचडी के छात्र राहुल ने आतंकवादी हमलों के जवाब में इस्राइल द्वारा हमास के खिलाफ युद्ध की घोषणा के बाद के हालात के बारे में बताया। साथ ही कैसे दूतावास ने उनकी मदद की यह भी बताया।
जब जंग शुरू हुई तो...
राहुल ने कहा, 'जब युद्ध शुरू हुआ, तो यह बहुत चौंकाने वाला था। उस दिन चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। बाद में चीजें स्पष्ट हो गई हैं। दूतावास ने घर वापस आने वाली उड़ान के बारे में हमसे संपर्क किया। उन्होंने हमें उन सभी को वापस भेजने का आश्वासन दिया जो घर जाना चाहते थे।'
राहुल ने कहा कि भारतीय दूतावास ने तेजी से लोगों को निकालने का प्रबंध किया और सुनिश्चित किया कि सभी छात्र दो से तीन दिनों के भीतर अपने घर लौट सकें। उन्होंने कहा कि आखिरकार हमें दो से तीन दिनों के अंदर वापस बुला लिया गया। उन सभी लोगों की तरह जो घर जाना चाहते थे, हमने ईमेल के माध्यम से अपनी इच्छा जताई थी। फिर उन्होंने हमें तीन दिनों के अंदर घर वापस बुला लिया।'
उन्होंने अधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्ट मार्गदर्शन के लिए सराहना व्यक्त कर कहा, 'हां, यह बहुत स्पष्ट था और हम जानते थे कि वास्तव में क्या करना है।'
हमले के बाद दूतावास से एक ईमेल मिला
एक अन्य भारतीय छात्र ने भारत और इस्राइल दोनों सरकारों के प्रति आभार व्यक्त किया। उसका कहना है, 'सात अक्तूबर के हमले के बाद हमारे पास दूतावास से एक ईमेल आया। इसके बाद हमने दूतावास और भारत सरकार से संपर्क किया। भारतीय दूतावास ने मदद की। उन्होंने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कीं। सब कुछ सुचारू रूप से हुआ। इसलिए हम भारत सरकार के साथ-साथ इस्राइल सरकार को भी धन्यवाद देना चाहते हैं।'
भारत ने चलाया था ऑपरेशन अजय
पिछले साल 11 अक्तूबर को, भारत सरकार ने ऑपरेशन अजय शुरू किया, जो फंसे हुए और परेशान भारतीय नागरिकों की मदद करने के लिए एक ऑपरेशन था, जो इस्राइल से घर लौटने के इच्छुक थे। ऑपरेशन का नाम संस्कृत शब्द 'अजय' के नाम पर रखा गया था, जिसका अर्थ है 'अविजय'।
दिसंबर 2023 तक, 1,309 भारतीय नागरिक, 14 ओसीआई कार्ड धारक और 20 नेपाली 'ऑपरेशन अजय' के तहत इस्राइल से भारत लौटे।
इस्राइली शोधकर्ता ने बताई आपबीती
अल्मा रिसर्च एंड एजुकेशन सेंटर की अध्यक्ष तथा संस्थापक और इस्राइल डिफेंस फोर्सेज इंटेलिजेंस कॉर्प्स की पूर्व शोधकर्ता सरित जेहावी ने बताया, 'युद्ध आठ अक्तूबर को शुरू हुआ और तब से यहां हर दिन हिज्बुल्ला एंटी-टैंक मिसाइलों से हमला कर रहा है। उन्होंने एक भारतीय विदेशी कामगार की भी हत्या कर दी। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से 43 शहरों में 60 हजार इस्राइलियों को निकाला गया था। यह शहर खंडहर में बदल गए हैं। मौजूदा स्थिति मेरे जैसे नागरिकों को भी प्रभावित करती है, जिन्हें यहां से निकाला नहीं गया था।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं सीमा से नौ किलोमीटर दूर रहती हूं और इन इलाकों से नागरिकों को नहीं निकाला गया। हम अपने चारों ओर हमले की आवाज सुनते हैं। कई बार सायरन बजते हैं। सब कुछ बदल गया। इस युद्ध के शुरू होने के बाद से हमारा जीवन पहले जैसा नहीं रहा है। हालांकि, जो चीज हमें ज्यादा परेशान करती है या सबसे खराब स्थिति, जिसका हमें अब डर है वह यह है कि हिज्बुल्ला गैलील पर कब्जा करने की अपनी आक्रामक योजना को अंजाम दे रहा है।'
इस्राइल-हमास के बीच छह माह से जंग जारी
हमास ने सात अक्तूबर को इस्राइली शहरों पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागकर हमले की शुरुआत की थी। इसके बाद हमास के आतंकियों ने इस्राइल में घुसकर लोगों को मौत के घाट उतारा। इसके जवाब में इस्राइल ने हमास आतंकियों के खिलाफ गाजा में ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन में गाजा स्थित हमास के ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की गई है, जिससे अधिकतर गाजा खंडहर में तब्दील हो गया है। अब तक इस्राइल और गाजा में कुल मिलाकर 30000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है