उत्तर का युद्ध प्रभावित क्षेत्र खाइफा हो या दक्षिण का गाजा पट्टी से लगता हुआ इलाका सेडरत या या हो सेंटर का तेल अवीव या यरुशलम। बीते 36 घंटे से इस्राइल में सबसे बड़ा त्योहार योम किप्पुर मनाया जा रहा था। तेल अवीव के रहने वाले एमोख ओल कहते हैं कि 1973 के बाद यह पहला त्यौहार पड़ा है जब उनका पूरा देश युद्ध में होने के बाद इसको मना रहा है। वह कहते हैं कि उनको इस बात की चिंता है कि उनके देश में इस वक्त क्या हालात हैं। लेकिन उनको भरोसा है कि उनकी सेना इतनी सक्षम है कि वह युद्ध में होने के बाद भी खुली सड़कों पर नाच सकते हैं, गा सकते हैं।
तेल अवीव की सड़कों पर अमर उजाला ने युद्ध में पड़े हुए इस देश के लोगों की हिम्मत और अपने देश की सेना के लिए जमकर प्यार देखा। यहां के सबसे बड़े कमर्शियल सेंटर आरजेली के सामने की सड़कों पर करीब चालीस युवाओं का ग्रुप बीच सड़क पर अपने देश के पारंपरिक गीत गा रजा था। इसमें छोटे बच्चे भी थे और उम्र दराज लोग भी। इसमें शामिल ओलुख सेम कहते हैं कि वह बचपन से ही युद्ध देखते आए हैं। इसलिए हमास, हिजबुल्लाह और ईरान की मिसाइलें और युद्ध उनकी हिम्मत को नहीं तोड़ सकते। वह कहते हैं कि आप सड़कों पर मनाए जा रहे जश्न को देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या हमारे ऊपर युद्ध का कोई असर दिख रहा है।
कुछ दिन पहले तेल अवीव इलाके में लगातार सायरन बजते रहे थे। इसका मतलब यह था कि दुश्मनों ने इस इलाके के आसपास मिसाइले दागनी शुरू की हैं। लेकिन उन मिसाइलो की चिंता से दूर और बजने वाले सायरनों से निश्चिंत एलिन छोटे बच्चे के साथ सड़कों पर फुटबॉल खेलने निकली थी। इस्राइल डिफेंस फोर्स की सैनिक एलेन बताती हैं कि वह अपने दुश्मनों को किसी भी हद में जाकर मुंह तोड़ जवाब दे सकती हैं। इसलिए उनको ऐसी मिसाइल और लगातार बजने वाले सायरनों की बिल्कुल चिंता नहीं है। उनका कहना है कि वह बचपन से ऐसे माहौल में पली बढ़ी हैं कि युद्ध नाम का डर उनको विचलित नहीं करता है। वह यही अपने छोटे बच्चे के अंदर डेवलप करना चाहती हैं। इसीलिए वह अपने बच्चों को ऐसे माहौल में भी सड़क पर फुटबॉल खिकाने लाई हैं।
युद्ध में पड़े हुए इस्राइल के बड़े शहर तेल अवीब में साइकिल चला रहे बच्चों की टोली भी बड़ी मस्त थी। छोटे-छोटे बच्चों ने जब अपना वीडियो बनाते हुए देखा तो सब एक साथ इकट्ठे होकर डांस करने लगे। यह सभी खुली हुई सड़कों पर साइकिलिंग करने के लिए निकले थे। यह पूछने पर की इस वक्त तो यहां युद्ध चल रहा है, सुरक्षा का भी अलर्ट जारी हुआ है, फिर भी सभी लोग साइकिल चला रहे हो, डर नहीं लगता। इसका जवाब देते हुए बच्चों ने हमास और हिजबुल्लाह को ललकारना शुरू किया। इन बच्चों का कहना था कि हमास और हिजबुल्लाह के आतंकियों की वजह से वह डर जाएं ऐसा नहीं हो सकता।
यहां की एक रिहायशी सोसाइटी के करीब दर्जन भर से ज्यादा छोटे-छोटे बच्चे भी सड़कों पर साइकिल चलाने उतरे थे। इन बच्चों के परिजनों का कहना था कि आप विदेश से युद्ध कवर करने आए हो इसलिए आपको यह बैटलफील्ड नजर आता है। लेकिन हमारे लिए यह युद्ध क्षेत्र नहीं है। यहां की सगोना मार्केट के रिहायशी इलाके में रहने वाले ओलिव डेल कहते हैं कि अगर हम लोग छोटे छोटे बच्चों के साथ सड़कों पर जश्न मनाने के लिए नहीं उतरेंगे तो हमारी सेना पर इसका कुछ और ही प्रभाव पड़ेगा। हम अपनी सेना को बच्चों के साथ सड़कों पर उतरकर जश्न मनाते हुए खेलते और गाते हुए यह जताना चाहते हैं कि उनकी वजह से हम सुरक्षित हैं।