जर्मनी में नई सरकार के गठन के लिए तीन पार्टियों में लगभग सहमति बन गई है। लेकिन वित्त मंत्रालय किसे मिलेगा, इस सवाल को लेकर बात अटकी हुई है। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (एसपीडी), ग्रीन पार्टी, और फ्री डेमोक्रेट्स (एफडीपी) के बीच नई सरकार बनाने पर बातचीत चल रही है। इनमें मिल कर सरकार बनाने पर सहमति बन गई है। लेकिन मंत्रालयों के बंटवारे पर बात अटकी हुई है। इन पार्टियों ने कहा है कि अंतिम सहमति बनने में अभी एक महीना और लग सकता है।
जर्मनी में सितंबर के आखिर में नई संसद के लिए चुनाव हुआ था। उसमें एसपीडी सबसे बड़ा दल बन कर उभरी। जर्मनी की सरकारी प्रसारण संस्था डोयेचेविले की वेबसाइट डीडब्ल्यू.कॉम के मुताबिक वित्त मंत्रालय को लेकर ग्रीन पार्टी और एफडीपी में खींचतान चल रही है। राजनीति शास्त्री उवे जुन ने इस वेबसाइट से कहा- ‘जर्मनी में चांसलर के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका वित्त मंत्री की ही होती है। इसकी वजह यह है कि बजट बनाना उसका काम होता है। यानी वित्तीय संसाधनों से संबंधित नीति का निर्माण उसके हाथ में होता है।’
एसपीडी के हान्स आइचेल 1999 से 2005 के बीच जर्मनी के वित्त मंत्री थे। उन्होंने एक जर्मनी रेडियो स्टेशन से बातचीत में कहा कि वित्त मंत्री बाकी सभी मंत्रालयों की मांग को वीटो कर सकता है। आइचेल ने कहा कि लेकिन सरकार की सफलता किसी ताकतवर मंत्री से नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल के भीतर आपसी सहयोग पर निर्भर करती है।
जानकारों के मुताबिक जर्मनी के वित्त मंत्री की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वजनदार भूमिका होती है। आइचेल ने कहा कि जर्मनी का वित्त मंत्रालय ही असली यूरोपियन मंत्रालय है। विश्लेषकों के मुताबिक इसी वजह से वित्त मंत्रालय नई सरकार के गठन में अभी तक एक रुकावट बना हुआ है। चूंकि चांसलर एसपीडी के शोल्ज बनेंगे, इसलिए वित्त मंत्रालय का फैसला ग्रीन और एफडीपी के बीच होना है। खबरों के मुताबिक इन दोनों में से कोई पार्टी यह मंत्रालय छोड़ने को राजी नहीं है।