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जर्मनी में आम चुनाव: मतदान से पहले जर्मनी में आशंकाएं, कॉन्सपिरेसी थ्योरीज की भरमार

Sat, 25 Sep 2021 08:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन

सार

जानकारों के मुताबिक रिच्सबरगर मूवमेंट उसी तरह का समूह है, जैसा अमेरिका क्यूएनॉन है। क्यूएनॉन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थक है। ट्रंप को क्यूएनॉन अमेरिका का उद्धारकर्ता मानता था। रिच्सबरगर के मुताबिक जर्मनी के उद्धारकर्ता ‘कोमोडर जेनसन’ हैं...

 
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जर्मनी का चांसलर एंजेला मर्केल - फोटो : Twitter
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विस्तार
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जर्मनी में आम चुनाव से ठीक पहले साइबर हमले की आशंका और षड्यंत्र की कहानियों ने माहौल में संदेह भर दिया है। सोशल मीडिया पर षड्यंत्र की एक कहानी यह फैली है कि चुनाव के बाद उसके नतीजों को रद्द कर दिया जाएगा, क्योंकि जर्मन राज्य अवैध है।

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उधर ये आरोप यूरोपीय आयोग ने लगाया है कि रूस यूरोप की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश कर रहा है। जर्मनी में मतदान से ठीक पहले ये आए यूरोपीय आयोग के इस बयान ने यहां माहौल को और संदिग्ध बना दिया है। शुक्रवार को आयोग ने कहा- ‘यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों ने दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों के लक्षण देखे हैं। ये घोस्टराइटर के नाम से चलाई गई हैं, जिसका संबंध रूस सरकार से है।’

आयोग ने कहा- ‘ये गतिविधियां अस्वीकार्य हैं, क्योंकि वे हमारी अखंडता, सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों, सिद्धांतों और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करती हैं।’ आयोग के बयान के मुताबिक साइबर हमलों में यूरोपीय संसद के अनगिनत सदस्यों, सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं, पत्रकारों और सिविल सोसायटी के सदस्यों को निशाना बनाया गया है। इनके तहत उनके कंप्यूटर सिस्टम और पर्सनल एकाउंट्स में घुसपैठ कर उनके डेटा की चोरी की गई है।
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विश्लेषकों के मुताबिक ये बयान जिस मौके पर आया, उससे सीधे तौर पर जर्मनी के चुनाव को लेकर आशंका खड़ी हुई है। आयोग ने कहा है कि जिन लोगों को रूसी साइबर गतिविधियों में निशाना गया, उनमें जर्मनी के राजनेता और अधिकारी भी शामिल हैँ।

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उधर बीबीसी की एक खबर के मुताबिक जर्मनी में सोशल मीडिया पर इस समय ऐसी चर्चा की भरमार है, जिनका कोई आधार नहीं है। उनमें एक कहानी यह भी है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और ऑस्ट्रिया को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता नहीं मिली थी। इसलिए जर्मनी में हो रहा चुनाव अवैध है। ज्यादातर ऐसे दावे रिच्सबरगर मूवमेंट नाम के समूह की तरफ से किए और फैलाए जा रहे हैं। ये आंदोलन वर्तमान जर्मनी को एक वैध देश मानने से इनकार करता है।

बीबीसी के मुताबिक रिच्सबरगर मूवमेंट धुर दक्षिणपंथी विचारों का और यहूदी विरोधी संगठन है। उसका दावा है कि हिटलर के समय जिस जर्मन राज्य की स्थापना हुई थी, वह अभी भी कायम है। उसकी वही सीमाएं हैं, जो 1939 के पहले थीं। जबकि इतिहास यह है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में मित्र देशों ने दो देशों- पश्चिमी और पूर्वी जर्मनी की स्थापना की। ये दोनों राज्य उस क्षेत्र में बनाए गए, जिन पर मित्र देशों का कब्जा हुआ था। जो क्षेत्र सोवियत संघ के कब्जे में था, उस पर पूर्वी जर्मनी बना था। सोवियत खेमा ढहने के बाद 1990 में पूर्वी जर्मनी का पश्चिमी जर्मनी में विलय हो गया।

जानकारों के मुताबिक रिच्सबरगर मूवमेंट उसी तरह का समूह है, जैसा अमेरिका क्यूएनॉन है। क्यूएनॉन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थक है। ट्रंप को क्यूएनॉन अमेरिका का उद्धारकर्ता मानता था। रिच्सबरगर के मुताबिक जर्मनी के उद्धारकर्ता ‘कोमोडर जेनसन’ हैं। कोमोडर जेनसन टेलीग्राम एप के अपने चैनल पर लगातार संदेश प्रकाशित करता है। रिस्चबर्गर ने ये कहानियां फैलाई हैं कि अमेरिका में ट्रंप फिर राष्ट्रपति बनेंगे और उनकी मदद से जर्मनी में ‘वैध’ सरकार बनेगी।
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