चीन और जापान के युद्ध को लेकर 1965 में फिल्म बनी थी "टनल वाॅरफेयर"। तकरीबन 58 साल पुरानी इस चीनी फिल्म को अब देश और दुनिया के बड़े-बड़े रक्षा मामलों के विशेषज्ञ गाजा में बनाई गई तकरीबन 500 किलोमीटर के क्षेत्रफल की टनल नेटवर्क से जोड़कर देख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस फिल्म में जिस तरीके से चीन और जापान के युद्ध में टनल के माध्यम से चीन के नागरिक बचाव का बंदोबस्त कर हमले भी करते हैं, ठीक उसी पैटर्न पर हमास के आतंकी गाजा में इस टनल का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही नहीं दुनिया भर में इस तरह की टनल से आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिए जाने की चर्चाओं के बीच चीन के भीतर भी इस बात की भी चर्चा शुरू हुई क्या हम हमास आतंकियों को चीन की सेना की ओर से गाजा में टनल नेटवर्क में मदद मिल रही है। चीन के प्रोफेसर ने तो खुलकर चीनी सेना का इसमें हाथ होने का आरोप लगाया है।
गाजा में हमास के आतंकियों की ओर से टनल नेटवर्क पर समूची दुनिया में चर्चाएं हो रही हैं। खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में इजराइल और इजराइल का समर्थन कर रहे सभी देश अब इस पर काम कर रहे हैं कि आखिर वो कौन देश हैं जिन लोगों ने गाजा में हमास के लिए टनल बनाने के बंदोबस्त और इंतजाम करने में मदद की। रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गाजा में बनाई गई टनल में जो खबरें मिल रही है उसमें चीन के बड़े योगदान की बात कही जा रही है। चीन की ईस्ट चीन यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाले प्रोफेसर चेन हॉन्ग ने तो खुलकर आरोप लगाया है कि चीन की सेना ने गाजा शहर में हमास के आतंकियों के लिए टनल नेटवर्क में पूरी मदद की है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईस्ट चीन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हॉन्ग के आरोपों के बाद हमास के आतंकियों की मदद करने में चीन बेनकाब हो रहा है।
खुफिया एजेंसी से ताल्लुक रखने वाले विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रोफेसर हॉन्ग ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जापान और चीन के 1937 से 1938 के युद्ध के दौरान जिस तरीके की तकनीकी का चीन ने सुरंग बनाकर इस्तेमाल किया था,ठीक उसी पैटर्न पर ही गाजा शहर के भीतर हमास के आतंकियों ने टनल बनाई है। पूर्वी चीन की नॉरमला यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाले अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफेसर कहते हैं कि चीन और जापान के युद्ध के बाद 1965 में बनाई गई "टनल वाॅरफेयर" नाम की फिल्म में इसी तरह की टनल का न सिर्फ नेटवर्क दिखाया गया है बल्कि हमास के आतंकी उसी तरीके से हमला भी कर रहे हैं। इस तरीके से कनेक्शन जुड़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब इस बात की भी पड़ताल की जा रही है क्या चीन की ओर से गाजा में हमास के आतंकियों को मदद के लिए चीनी सेना ने मदद की है।
विदेशी मामले के जानकार और खुफिया एजेंसी से ताल्लुक रखने वाले एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि चीनी जर्नलिस्ट और यूट्यूबर प्रोफेसर लियू झांग ने इस बात का भी खुलासा किया है कि चीनी सेना के अधिकारियों की सलाह पर ही हमास के आतंकियों ने टनल के भीतर खतरनाक इंतजाम किए थे। सूत्रों का कहना है कि हमास के आतंकियों ने जिस तरीके से स्कूल बस अड्डे अस्पताल चर्च और अन्य पब्लिक प्लेस के नीचे टनल बनाए वह सिर्फ हमास के आतंकियों के दिमाग की उपज नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा इस बात की की जा रही है कि चीन के अधिकारियों की शह पर ही क्या हमास आतंकियों ने इन जगहों के नीचे टनल का इस्तेमाल किया ताकि बड़े युद्ध के दौरान इसको "ह्यूमन शील्ड" के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके। रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब यह तो इजराइल के लिए जांच का विषय हो सकता है कि ह्यूमन ढाल के तौर पर अस्पताल, चर्च और स्कूल के नीचे बनाई गई टनल की उपज किसकी थी। फिलहाल इस युद्ध के दौरान यह साफ हो चुका था कि हमास के आतंकियों ने ह्यूमन शील्ड के तौर पर ही अस्पताल और अन्य जगहों पर टनल को बनाकर अपना सबसे बड़ा आतंक का अड्डा बनाया।
दरअसल हमास के आतंकियों ने गाजा में टनल के माध्यम से आतंक की पूरी दुनिया बसाई थी। जानकारी के मुताबिक पूरी गाजा पट्टी में 1300 टनल के माध्यम से 500 किलोमीटर के क्षेत्रफल से ज्यादा इलाके में यह सुरंगें हमास के आतंकियों की ओर से बनाई गई थीं। इसमें युद्ध में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी हथियारों समेत महीनों तक रहने का पूरा बंदोबस्त भी था। रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यही वजह है कि लगातार इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद भी हमास के आतंकी इन सुरंगों के माध्यम से बचते जा रहे थे। एक अनुमान के मुताबिक इस पूरी टनल पर हमास ने तकरीबन डेढ़ बिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
जानकारी के मुताबिक बीते कई सालों से हमास लगातार गाजा पट्टी के अलग-अलग इलाकों में इसराइल से नफरत करने वाले देशों की मदद से कई किलोमीटर की सुरंग बनाता आया था। इन सुरंगों को बाकायदा स्थानीय स्तर के मिस्त्री और दिहाड़ीदार, जो कि हमास के आतंकी समूह में शामिल हैं, उनके माध्यम से मैनुअली तैयार किया गया था। गाजा पट्टी की भौगोलिक परिस्थितियों और वहां के आतंकियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने वाली खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हमास के आतंकियों ने बीते कई सालों के भीतर समूचे गाजा पट्टी में तकरीबन 500 किलोमीटर से ज्यादा का अपना टनल नेटवर्क तैयार कर लिया था। सूत्रों का कहना है कि इनमें सबसे ज्यादा टनल गाजा शहर की जमीन के भीतर बनी हुई हैं। इनमें से बहुत सी सुरंगें तो एक दूसरे से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। सूत्रों के मुताबिक यह वे टनल हैं जिनमें रहकर हमास के आतंकी न सिर्फ इस्राइल पर आतंकी हमले कर रहे थे, बल्कि बीते कई सालों से इन टनल के माध्यम से लगातार युद्ध भी कर रहे थे।