2030 तक बढ़ जाएगी खाने की डिमांड।
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इन दिनों पूरा विश्व एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहा है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, बढ़ती जनसंख्या, बढ़ती बीमारियां हर किसी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। विकास की दौड़ में लगभग हर देश ने प्रकृति को काफी नुकसान पहुंचाया। अब इसका असर दिखने लगा है। आने वाले दिनों में स्थितियां भयावह हो सकती हैं।
कुछ दिनों पहले एक ऐसी ही रिपोर्ट सामने आई है। कहा गया है कि आने वाले 27 साल में यानी 2050 तक दुनियाभर का परंपरागत खाना खत्म हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने खाने का एक मेन्यू तैयार किया है। इसमें बताया है कि जब दुनियाभर से मौजूदा परंपरागत भोजन खत्म हो जाएगा तो उस दौरान लोगों की थाली में क्या-क्या बचेगा? लोग सुबह क्या नाश्ता करेंगे, दोपहर और फिर रात में क्या खाएंगे? आइए जानते हैं रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है?
पहले जान लीजिए खाना खत्म होने के दावे में क्या-क्या कहा गया है?
भोजन
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सोशियो बायोलॉजिस्ट एडवर्ड विल्सन ने पिछले दिनों एक डराने वाली चेतावनी जारी की। इसमें दावा किया कि अगले 27 सालों में इंसानों के पास भोजन समाप्त हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर लोग खुद में बदलाव नहीं लाएंगे तो साल 2050 की शुरुआत तक इंसानों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं रहेगा। यही नहीं, तब भोजन और पानी को लेकर अगला विश्वयुद्ध होगा।
एडवर्ड विल्सन ने कहा कि अगर हर कोई शाकाहारी बन जाता है, तो धरती के पास उतना अन्न होगा जिससे दुनिया के लोगों का पेट भर सके। विल्सन के मुताबिक, मीट खाने वाले लोगों को ज्यादा भोजन की जरूरत होती है। जबकि 2050 तक दुनिया की आबादी करीब 10 अरब हो जाएगी। ऐसे में सभी को खाने के लिए अबकी तुलना में 70 प्रतिशत अधिक अन्न चाहिए। वहीं, इसके पहले 2030 तक खाने की डिमांड 35% तक बढ़ जाएगी।
डायटिशियन प्रेरणा सिंह भी एक रिपोर्ट का हवाला देती हैं। कहती हैं, 'जनसंख्या बढ़ने के साथ भोजन की खपत भी बढ़ रही है। ऐसे में जितना भोजन पिछले आठ हजार सालों में पैदा हुआ है उससे अधिक भोजन की जरूरत 40 सालों में होगी। लोग हर दिन ज्यादा भोजन कर रहे हैं और बर्बाद भी कर रहे हैं।'
अब जानिए जब परंपरागत भोजन खत्म हो जाएगा फिर क्या बचेगा आपकी थाली में?
पांडनस टेक्टोरियस
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भोजन खत्म होने की रिपोर्ट के बाद अब वैज्ञानिकों ने एक नई रिपोर्ट जारी किया है। इसमें बताया गया है कि जब 2050 तक परंपरागत भोजन खत्म हो जाएगा तब लोगों को खाने में क्या-क्या मिलेगा?
बीबीसी ने कीव के वैज्ञानिक डॉ सैम पिरिनोन का हवाला दिया है। डॉ. सैम के मुताबिक, जलवायु में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। इसके लिए खाद्य पदार्थों का संकट भी बढ़ेगा। जलवायु परिवर्तन के चलते खाद्य पदार्थों का उत्पादन घट जाएगा, वहीं बढ़ती आबादी के चलते इसकी खपत कई गुना अधिक हो जाएगी।
डॉ. सैम आगे कहते हैं, 'हां, यह सभी है कि अगले 27 सालों में खाद्य पदार्थों का संकट लोगों को परेशान कर देगा, लेकिन इसका विकल्प भी होगा। अभी दुनियाभर में सात हजार से ज्यादा ऐसे पौधे हैं, जिनसे इंसान को भोजन मिल सकता है। इनमें से केवल 417 पौधों का ही मौजूदा समय इस्तेमाल हो रहा है।'
क्या-क्या मिलेगा?
डॉ. सैम के मुताबिक, भविष्य में लोगों को सुबह के नाश्ते में फाल्स बनाना या फिर पांडनस टेक्टोरियस मिल सकता है। पांडनस समुद्र के किनारे वाले इलाकों में पाया जाता है। इसके अलावा अनानास, बींस यानी सेम फली, राजमा, फोनियो, फली की अलग-अलग प्रजातियां लोगों को खाने में मिल सकती है। हालांकि, ये मौजूदा खाद्य पदार्थों से अलग प्रजातियां होंगी।
आंकड़े जो आपको जरूर जानने चाहिए
भोजन बर्बाद नहीं करना चाहिए।
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- विकासशील देशों के गरीब लोग अपनी आय का 60 से 80 प्रतिशत हिस्सा केवल खाना जुटाने पर खर्च करते हैं। अमेरिका के लोग 10% से भी कम खर्च करते हैं।
- दुनिया के 75 प्रतिशत खाद्य पदार्थ का उत्पादन केवल 12 प्लांट (पौधे) और पांच जानवरों की प्रजातियों से होता है।
- 165 करोड़ लोग बचपन से ही खाने की कमी के चलते कुपोषित होते हैं।
- अमेरिका 141 ट्रिलियन कैलोरी युक्त भोजन हर रोज वेस्ट करता है। वहीं, अफ्रीका 165 बिलियन कैलोरी युक्त खाना पूरे सालभर में खरीदता है।
- 2030 तक दुनियाभर में खाने की मांग 35% तक बढ़ जाएगी।
लोगों को अपनी आदत में करना चाहिए सुधार
हेल्दी डाइट
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डायटिशियन प्रेरणा सिंह ने कहा, 'आज भारत समेत दुनिया के कई देशों में खाने को लेकर तीन वर्ग बंटा हुआ है। पहला वह है, जिसे सही मात्रा में खाद्य पदार्थ नहीं मिल रहा है। ऐसे लोग कुपोषण का शिकार होते हैं। तमाम तरह की बीमारियां इसी के चलते हो रहीं हैं। दूसरे वह लोग हैं, जो जरूरत से ज्यादा खाते हैं। ऐसे लोग भी बीमारी की चपेट में हैं। तीसरे वह लोग हैं, जो सामान्य भोजन कर रहे हैं। लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है।'
प्रेरणा आगे कहती हैं, 'अगर हर कोई शरीर की जरूरत के हिसाब से और खुद के शारीरिक संरचना के अनुसार भोजन ग्रहण करे तो खाद्य पदार्थों के संकट को टाला जा सकता है। इसके साथ ही लोगों को कई तरह की बीमारियों से भी बचाया जा सकता है। इससे जहां, इंसान को व्यक्तिगत तौर पर फायदा मिलेगा, वहीं देश का विकास भी तेजी से हो पाएगा। आर्थिक स्तर पर देश मजबूत हो सकेगा।'