मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सोमवार को माले और बीजिंग के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का समर्थन किया। इसको लेकर उन्होंने कहा कि इससे उनके देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। मुइज्जू ने हाल ही में चीन का दौरा किया था।
मुइज्जू के पूर्ववर्ती इब्राहिम सोलिह की सरकार ने मालदीव और चीन के बीच एफटीए को लागू नहीं किया। एफटीए पर चीन समर्थक राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की सरकार दौरान 2014 में हस्ताक्षर किए गए थे। पूर्व राष्ट्रपति सोलिह को भारत समर्थक माना जाता है।
मुइज्जू ने सोमवार को अपने भाषण में कहा, चीन के साथ एफटीए लागू होने से मालदीव के व्यवसायों व अर्थव्यवस्था को अनगिनत लाभ मिलेंगे। इसलिए, मुझे भरोसा है कि यह संसद इस समझौते को लागू करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पूरा समर्थन करेगी। मुझे उम्मीद है कि कई अन्य देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किए जाएंगे और उन्हें लागू किया जाएगा।
इससे पहले जनवरी में चीन के अपने राजकीय दौरे के दौरान मुइज्जू ने कहा था कि उनकी सरकार चीन के साथ हस्ताक्षरित एफटीए को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ वाणिज्यिक संबंधों का प्रतीक बताया था।
नौ जनवरी को चीन में 'इन्वेस्ट मालदीव फोरम' में अपने संबोधन में मुइज्जू ने दोनों देशों के बीच हस्ताक्षित एफटीए पर प्रकाश डाला था। जिसमें कहा गया था कि एफटीए द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, खासतौर पर चीन को मछली उत्पादों के निर्यात को बढ़ाकर। मुइज्जू को चीन समर्थक नेता माना जाता है।
मुइज्जू ने इस फोरम को उनकी सरकार मालदीव की अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और पर्यटन उद्योग चलाने और आगंतुकों (पर्यटकों) की संख्या को बढ़ावा देने वाला बताया था। चीन और मालदीव के बीच वर्ष 2022 में द्विपक्षीय व्यापार कुल 451 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। चीन ने 1972 में माले के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। तबसे वह मालदीव के विकास में मदद प्रदान करता रहा है।
मुइज्जू के भाषण का संसद में विरोध, 56 सदस्यों ने किया बहिष्कार
मालदीव की संसद में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पहले संबोधन में भारतीय सैनिकों की वापसी की घोषणा के दौरान 56 सदस्यों ने बहिष्कार किया। संबोधन के दौरान सदन में महज 24 सदस्य मौजूद थे। पुराने मित्र भारत विरोधी रुख पर देश की दो मुख्य विपक्षी पार्टियों-मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) और डेमोक्रेट्स पार्टी ने मुइज्जू के संबोधन का बहिष्कार करने का फैसला किया था और मुइज्जू की भारत विरोधी विचारधारा की आलोचना की थी।
मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी और डेमोक्रेट्स ने किया कड़ा विरोध
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुइज्जू ने दावा किया कि उनका प्रशासन ऐसे किसी भी समझौते की अनुमति नहीं देगा जो द्वीप राष्ट्र की संप्रभुता से समझौता करता हो। मुइज्जू ने कहा कि वह विशेष आर्थिक क्षेत्र की 24 घंटे निगरानी के लिए मालदीव सेना की क्षमता बढ़ाएंगे। दूसरी तरफ, विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) और डेमोक्रेट्स ने सरकार के अलोकतांत्रिक तरीकों पर अपना कड़ा विरोध जताते हुए संसद यानी पीपुल्स मजलिस की बैठक का बहिष्कार किया।
भारत विरोधी नीतियों के चलते खफा विपक्ष
संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को वर्ष के पहले कार्यकाल के पहले सत्र में संसद को संबोधित करना होता है और इस दौरान देश की स्थिति की रूपरेखा तैयार करना और सुधार लाने के लिए अपनी सिफारिशों को रेखांकित करना जरूरी होता है। पिछले महीने हुए एक राजनयिक विवाद के बीच दोनों विपक्षी दलों ने भारत को देश का सबसे पुराना सहयोगी बताया था।
सत्ता पर खतरा बरकरार
बता दें कि सत्ता संभावने के बाद से ही मुइज्जू ने चीन के साथ नजदीकी दिखा रहे हैं जबकि पुराने मित्र भारत के साथ विरोधी रुख अपना रहे हैं। ऐसे में संसद में उनका समर्थन कम हो रहा है और सत्ता भी खतरे में बनी हुई है।
मंत्रियों के बयानों से बढ़ी कड़वाहट
पिछले महीने मालदीव और भारत के बीच उस समय तनाव बढ़ गया था जब मालदीव के पूर्व मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। इसे लेकर भारत ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। भारत की मशहूर हस्तियों ने मालदीव का बहिष्कार करने की अपील की थी। विवाद के बाद मालदीव जानेवाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विपक्षी दलों के विरोध की एक बड़ी वजह यह भी है।