फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाराजगी: 'ऑकस' गठन के बाद अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया से खफा हुआ फ्रांस, वापस बुलाए अपने राजदूत

Sat, 18 Sep 2021 08:27 AM IST
प्रशांत कुमार झा एजेंसी, पेरिस।

सार

हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत और सैन्य मौजूदगी को लेकर अमेरिका खासे चिंतित हैं। चीन को चित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने एक समझौता किया है।  जिसे ऑकस कहा जा रहा है। इसमें ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से पनडुब्बी बनाने की तकनीक दी जाएगी।  इस बीच फ्रांस ने अपने राजदूतों को यूएस और ऑस्ट्रेलिया से वापस बुला लिया है। 
विज्ञापन
फ्रांस के राष्ट्रपति मैंक्रो और जो बाइडन - फोटो : twitter
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी फ्रांस ने अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूत को वापस बुला लिए हैं। फ्रांस-अमेरिका में 18वीं सदी की क्रांति के दौरान बने रिश्तों में दरार का कारण अमेरिका द्वारा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ 'ऑकस' गठबंधन बनाना है। इसके चलते फ्रांस का ऑस्ट्रेलिया से अरबों डॉलर का पनडुब्बी करार टूटा है क्योंकि उसे एटमी ऊर्जा पनडुब्बी तकनीक अमेरिका से मिल रही है।

विज्ञापन


फ्रांस ने घोषणा की है कि वह विचार-विमर्श के लिए अपने अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के राजदूतों को वापस बुला रहा है। इसे उस सुरक्षा समझौते के विरोध के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें ब्रिटेन भी शामिल है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां इव लि द्रीयां ने कहा, हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के अनुरोध पर लिया गया यह असाधारण फैसला न्यायोचित है।

बता दें कि फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच डीजल पनडुब्बियों के निर्माण के लिए करीब 100 अरब डॉलर का सौदा हुआ था जो अब खत्म हो जाएगा। इससे फ्रांस नाराज है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा, समझौता खत्म करने का ऑस्ट्रेलिया का फैसला ‘सहयोगियों और साझेदारों के बीच अस्वीकार्य बर्ताव’ है। राजदूत फिलिप एतिने ने ट्वीट किया कि इन घोषणाओं का हमारे गठबंधनों, साझेदारियों व यूरोप के लिए हिंद-प्रशांत की महत्ता पर प्रत्यक्ष असर पड़ रहा है।
विज्ञापन


फ्रांस के करीबी संपर्क में है अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एमिली होर्न ने कहा कि बाइडन प्रशासन अमेरिका से फ्रांसीसी राजदूत फिलिप एतिने को पेरिस वापस बुलाने के फैसले को लेकर फ्रांसिसी अधिकारियों के करीबी संपर्क में है। उन्होंने कहा, हम उनकी स्थिति समझते हैं और मतभेदों को दूर करने के लिए अपने सबसे पुराने सहयोगी के साथ आने वाले दिनों में काम करते रहेंगे। ऐसा हमने लंबे गठबंधन के दौरान कई मौकों पर किया है।

ऑस्ट्रेलिया ने जताया खेद
ऑस्ट्रेलिया द्वारा पनडुब्बियों की आपूर्ति पर फ्रांसीसी नौसेना समूह के साथ समझौता खत्म करने के बाद फ्रांस के राजदूत की केनबरा से वापसी पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने खेद जताया है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, हम फ्रांस के साथ अपने रिश्तों को महत्व देते हैं और उसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक प्रमुख देश के रूप में देखते हैं।

अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया में पनडुब्बी समझौता एक बड़ी गलती
ऑस्ट्रेलिया में फ्रांस के राजदूत ज्यां पियरे थेबॉल्ट कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिकी पनडुब्बी समझौता होने के बाद फ्रांस के अनुबंध को रद्द करना एक बड़ी गलती है। फ्रांस के राजदूत ने यह टिप्पणी केनबरा में अपना आवास छोड़ते वक्त की। उन्होंने कहा, दो देशों के बीच हुई साझेदारी को बेहद ही खराब तरीके से संभाला गया। पेरिस और  केनबरा के बीच हथियार समझौता, भरोसा और आपसी समझ पर आधारित होना चाहिए था। बता दें कि फ्रांस के साथ 12 पनडुब्बियों के लिए 66 अरब डॉलर का यह समझौता 2016 में हुआ था।

ब्लिंकन ने अफगानिस्तान, चीन मुद्दों पर की ब्रिटिश विदेश मंत्री से बात 
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ब्रिटेन के नवनियुक्त विदेश मंत्री एलिजाबेथ ट्रस से मुलाकात में अफगानिस्तान, चीन और ईरान समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने बताया कि ब्लिंकन ने ट्रस को बधाई देते हुए अमेरिका-ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय रिश्तों के महत्व पर प्रकाश डाला। ब्लिंकन ने ट्रस से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी बात की।

नेड प्राइस ने बताया कि इस दौरान दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान, चीन जनवादी गणराज्य, ईरान और जलवायु संकट से निपटने के लिए बहुपक्षीय भागीदारी समेत विदेश नीति की साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और ऑस्ट्रेलिया व ब्रिटिश नेताओं के बीय रक्षा साझेदारी पर ऑकस समझौता हुआ है।

विदेश मंत्री ने फ्रांस के अपने समकक्ष से अफगानिस्तान के हालात पर की चर्चा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान समेत भारत-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर फ्रांस के विदेश मंत्री जीन येवेस ली ड्रायन के साथ चर्चा की। विदेश मंत्री ने ट्वीट पर इसकी जानकारी देते हुए न्यूयॉर्क में दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक को लेकर उत्साहित होने की बात कही। 

दोनों नेताओं के बीच बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है जब एक दिन पहले ही फ्रांस ने पनडुब्बी करार रद्द होने पर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापस बुला लिया। विदेश मंत्री ड्रायन ने कहा कि राजदूतों को ‘परामर्श’ के लिए वापस बुलाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पेरिस के साथ पनडुब्बी विकास कार्यक्रम को रद्द करने का ऑस्ट्रेलिया का निर्णय और अमेरिका के साथ एक नई साझेदारी की घोषणा सहयोगियों और भागीदारों के बीच अस्वीकार्य व्यवहार है। 

कैनबरा ने इस हफ्ते की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह अमेरिकी तकनीक से निर्मित परमाणु पनडुब्बी के पक्ष में फ्रांसीसी पारंपरिक पनडुब्बियों की खरबों की खरीद के समझौते को समाप्त कर रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें