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Afghanistan Floods: अफगानिस्तान में बाढ़ के कारण 300 से अधिक लोगों की मौत; कई प्रांतों में मंजर भयावह

Sat, 11 May 2024 06:29 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

बगलान में प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया के प्रमुख हेदायतुल्ला हमदर्द ने बताया कि बुर्का, नाहरीन और केंद्रीय बगलान में बाढ़ आई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को ढूंढने के लिए अभियान चलाया गया है।
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अफगानिस्तान में बाढ़ - फोटो : ANI/Reuters
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विस्तार
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अफगानिस्तान में मौसमी बारिश के चलते अचानक आई बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली है और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए हैं। तालिबान के एक अधिकारी ने सटीक आंकड़े बताए बिना कहा कि बाढ़ का सर्वाधिक बुरा असर उत्तरी क्षेत्र पर पड़ा है। उधर, संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि अचानक आई इस बाढ़ के चलते अकेले बगलान प्रांत में 300 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों घर नष्ट-क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

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शनिवार को संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओओम) ने बताया कि अफगानिस्तान के हालात बेहद खराब हैं। यहां अकेले बगलानी जदीद जिले में 1,500 घर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए। आईओएम आपातकालीन प्रतिक्रिया नेतृत्व ने अफगानिस्तान में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, इस जिले में 100 से अधिक लोग मारे गए हैं। तालिबान ने कहा, यहां शुक्रवार देर रात तक 62 लोग मारे जा चुके थे। प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, हमारे सैकड़ों साथी इस विनाशकारी बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। पड़ोसी तखर प्रांत में बाढ़ से करीब 20 लोग मारे गए, जबकि बदख्शां, घोर और हेरात प्रांत भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। मुजाहिद ने कहा, इस व्यापक तबाही के कारण राष्ट्रीय संपत्ति को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है। 

सैकड़ों घायल अस्पताल पहुंचाए गए
तालिबान रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि देश की वायु सेना ने पहले ही बगलान में लोगों को निकालना शुरू कर दिया है और अब तक बाढ़ में फंसे बड़ी संख्या में लोगों को बचाया है। क्षेत्र के सैन्य अस्पतालों में सैकड़ों घायलों को पहुंचाया गया है। शुक्रवार रात आई बाढ़ से पहले अप्रैल में भी देश में भारी बारिश-बाढ़ से 70 लोगों की मौत हो गई थी। लगभग 2,000 घर, तीन मस्जिदें और चार स्कूल भी क्षतिग्रस्त हो गए।
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ग्लोबल वार्मिंग के दुष्परिणाम
अफगानिस्तान जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। अपेक्षाकृत शुष्क सर्दियों का अनुभव करने के बाद, देश में मिट्टी के लिए वर्षा को अवशोषित करना मुश्किल हो जाता है। चार दशकों के युद्ध ने देश को दुनिया के सबसे गरीबों में से एक बना दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों का सामना करने के लिए सबसे खराब तैयारियों में से एक है।

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