संग्रहालय को आधिकारिक तौर पर 15 अगस्त को जनता के लिए खोला गया था, लेकिन इसका फीता 2 अक्तूबर को गांधी की 154वीं जयंती पर किया गया था। 13,000 वर्ग फुट के संग्रहालय (ईजीएमएच) की वास्तुकला गांधी के चौबीस चक्र वाले चरखे पर आधारित है। उन्होंने इसका इस्तेमाल औपनिवेशिक शासन से आजादी पाने के लिए किया था।
ईजीएमएच गांधी के जीवन के विभिन्न अध्यायों पर अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। इसमें भारत में बीता उनका बचपन, अफ्रीका में एक वकील के रूप में प्रारंभिक व्यस्क जीवन और उसके बाद सत्याग्रह आंदोलन एवं स्वतंत्रता के लिए अहिंसक संघर्ष को दर्शाया गया है।
संग्रहालय की अर्ध-वृत्ताकार बाहरी दीवारें महात्मा गांधी, मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला, बेट्टी विलियम्स और अन्य विभिन्न शांति कार्यकर्ताओं को दर्शाती हैं। संग्रहालय के सामने गांधी जी की एक मूर्ति लगी हुई है। संग्रहालय के उद्घाटन पर आमंत्रित किए गए अतिथियों में महात्मा गांधी के पौत्र डॉ. राजमोहन गांधी और मार्टिन लूथर किंग के भतीजे आइजैक न्यूटन फैरिस जूनियर, सीजीआई ह्यूस्टन डी मंजूनाथ शामिल थे।
इस मौके पर डॉ. राजमोहन गांधी ने कहा, ईजीएमएच मानवता को नफरत, हिंसा और वर्चस्व की भावना से परे ले जाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। गांधी और किंग दुनिया के लिए गरिमा, शांति और समानता के प्रतीक हैं।