अमेरिकी विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि अपने एक महत्वपूर्ण सहयोगी को नाराज करने की कीमत पर ईयू ने ये फैसला क्यों किया? इस बारे में ईयू के अधिकारियों का कहना है कि ईयू के दल के जाने भर से वेनेजुएला के चुनावों पर वैधता की मुहर नहीं लग जाएगी। इन अधिकारियों के मुताबिक ईयू को वेनेजुएला की राष्ट्रीय चुनाव परिषद से आमंत्रण मिला। उसमें पूछा गया था कि क्या 2005 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ईयू अपना पर्यवेक्षण दल भेज सकता है। इस पर ये राय बनी की एक दल वहां भेजना चाहिए। इन्हीं दिशानिर्देशों के आधार पर ईयू ने 2006 में अपना दल भेजा था।
ईयू के एक अधिकारी ने सीएनएन से कहा- ‘इराक, पेरू, पाकिस्तान या माली में चुनावों की निगरानी करने और वेनेजुएला में ऐसा करने के बीच कोई फर्क नहीं है। ईयू के पर्यवेक्षक दलों की मान्यता दुनिया भर में है। इन मामलों में हम अपने तर्क से चलते हैं। इस बारे में किसी और को हमें सफाई देने की जरूरत नहीं है।’
उधर इस बारे में एक सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी राय में वेनेजुएला में स्वतंत्र और निष्पक्ष क्षेत्रीय, राष्ट्रीय संसद के लिए और राष्ट्रपति चुनाव होना जरूरी है। तभी वहां मौजूदा संकट का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक समाधान निकलेगा। ईयू ने इस साल 25 जून और 14 अगस्त को अपने बयानों में कहा था कि वह इस अमेरिकी रुख से सहमत है। प्रवक्ता ने कहा- ‘अब उसने अपना दल वहां क्यों भेजने का फैसला किया है, इस बारे में ईयू के अधिकारियों से ही पूछा जाना चाहिए।’