उधर फ्रांस ने ईयू से ऐसा कानून बनाने को कहा है कि जिसके तहत कमतर प्रतिमानों के साथ खेती करने वाले देशों से ईयू से जुड़े देश अनाज का आयात रोक दें। फ्रांस अगले साल पहले छह महीनों तक ईयू की अध्यक्षता करेगा। इसलिए उसकी बातों को काफी वजन दिया जा रहा है। फ्रांस का कहना है कि जिन देशों की खेती में केमिकल्स का इस्तेमाल होता है, उनसे आयात पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। ईयू की नई योजना को फार्म टू फॉर्क (खेत से भोजन की मेज तक) कहा गया है।
बताया जाता है कि अमेरिका में कृषि लॉबी इसका जोरदार विरोध कर रही है। उसका कहना है कि ईयू पहले ही मांस के बारे में अलग प्रतिमान लागू कर चुका है, जिसकी वजह से अमेरिका से ईयू के लिए मीट का निर्यात मुश्किल हो गया है। जानकारों का कहना है कि अमेरिका सरकार ने अपनी फार्म लॉबी के दबाव में अपनी नीति तय की है।
विलसैक ने कहा कि ईयू के नियम व्यापार की भावना के अनुरूप नहीं हैं। लेकिन ईयू के ग्रीन डील (पर्यावरण रक्षा समझौता) के प्रमुख फ्रान्स टिमरमैन्स ने कहा है कि अब सिर्फ उत्पादकता बढ़ाना लक्ष्य नहीं हो सकता। उन्होंने कहा- ‘हमने ऐसा सिस्टम बना रखा है, जिसके तहत किसानों पर लगातार ज्यादा उत्पादन करने का दबाव डाला गया है। लेकिन इस सिस्टम ने धरती की क्षमता को उसकी सीमा तक पहुंचा दिया है। इसलिए हमें सफलता को देखने का तरीका बदलना होगा।’