इस सर्वे के मुताबिक 55 फीसदी मतदाताओं ने विपक्षी उम्मीदवारों को वोट देने की इच्छा जताई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि मतदाता इस बार स्मार्ट वोटिंग स्ट्रेटेजी अपनाने के मूड में हैं। इस रणनीति का सुझाव 2016 में विपक्षी नेता अलेक्सी नवालनी ने दिया था। उसके तहत मतदाताओं से अपील की गई थी कि वे यूनाइटेड रशिया पार्टी के अलावा किसी दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को वोट डालें।
जानकारों के मुताबिक 2019 में मास्को के स्थानीय ड्यूमा के चुनाव में मतदाताओं ने इसी रणनीति के तहत मतदान किया था। उसकी वजह से 45 में 20 सीटें विपक्षी दल जीतने में सफल रहे। उनमें से 13 सीटें कम्युनिस्ट पार्टी को मिली थीं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अगले संसदीय चुनाव में भी कम्युनिस्ट पार्टी को काफी सफलता मिलने की संभावना है।
इससे उदारवादी पार्टियों में बेचैनी देखने को मिल रही है। उदारवादी याबलोको पार्टी की तरफ से पिछली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ चुके नेता ग्रिगोरी यावलिन्स्की ने स्मार्ट वोटिंग स्ट्रेटेजी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ यूनाइटेड रशिया को हराने के लिए कम्युनिस्ट और स्टालिनवादी उम्मीदवार का समर्थन एक ‘मूर्खतापूर्ण विचार’ है। उनकी पार्टी के नेता निकोलाई रिबाकोव ने भी एक ट्विट में कहा- ‘मैं नहीं चाहता कि कुछ दलाल और चोरों को हराने के लिए दूसरे समूह के दलाल या चोरों का समर्थन किया जाए।’
पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष में ऐसे आपसी विरोधभाव का फायदा यूनाइटेड रशिया पार्टी को मिल सकता है। इसके अलावा मतदान प्रतिशत बहुत कम रहा, तो इसका लाभ भी उसे मिलेगा। सर्वेक्षणों के मुताबिक यूनाइटेड रशिया के समर्थक मतदाता वोट डालने आने के लिए अधिक कृत संकल्प हैं।