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रूस-यूक्रेन युद्ध: कमर तोड़ रही है खाद्य तेलों की महंगाई, ब्रिटेन से ईयू तक मचा हाहाकार

Wed, 06 Apr 2022 06:54 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

ब्रिटेन में एक लीटर वनस्पति तेल इस समय 1.30 पाउंड प्रति लीटर मिल रहा है, जो साल भर पहले की तुलना में 22 फीसदी ज्यादा है। सूरजमुखी का तेल 1.34 पाउंड प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में तीन चौथाई परिवार रसोई पकाने का तेल खरीदते हैं। इस पर हर साल ये परिवार 40 करोड़ पाउंड खर्च करते हैं...
 
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खाद्य तेल - फोटो : pixabay
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विस्तार
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यूक्रेन युद्ध के कारण लगे वित्तीय झटकों का असर ब्रिटेन के हर रसोई घर में महसूस किया जा रहा है। ये बात ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की एक विस्तृत रिपोर्ट में बताई गई है। जानकारों ने कहा है कि जो हाल ब्रिटेन का है, वही पूरे यूरोप और दुनिया के कई अन्य हिस्सों का भी है।

एक लीटर वनस्पति तेल 1.30 पाउंड

ब्रिटेन में ताजा जारी नील्सन आईक्यू स्कैनट्रैक डाटा के मुताबिक यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग हर चीज के दाम में भारी इजाफा हुआ है। लेकिन वनस्पती तेल के भाव तो कमरतोड़ स्तर तक पहुंच गए हैं। ब्रिटेन में एक लीटर वनस्पति तेल इस समय 1.30 पाउंड प्रति लीटर मिल रहा है, जो साल भर पहले की तुलना में 22 फीसदी ज्यादा है। सूरजमुखी का तेल 1.34 पाउंड प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में तीन चौथाई परिवार रसोई पकाने का तेल खरीदते हैं। इस पर हर साल ये परिवार 40 करोड़ पाउंड खर्च करते हैं।

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जानकारों का कहना है कि कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल खाने के अलावा खाद्य उद्योग में बड़े पैमाने पर होता है। बिस्कुट बनाने से लेकर डिब्बाबंद भोजन तैयार करने के कारखानों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इन तेलों के दाम बढ़ने का सीधा असर इन सभी खाद्य पदार्थों पर पड़ा है। इसके अलावा अब आशंका पैदा हो रही है कि जल्द ही ये तेल बाजार से गायब हो सकते हैं। ब्रिटेन में कुकिंग ऑयल की विक्रेता सबसे बड़ी कंपनी चेतावनी दे चुकी है कि इन तेलों का भंडार तेजी से चूक रहा है।

बाजार के जानकारों के मुताबिक अभी जो महंगाई अलग-अलग देशों में देखने को मिल रही है, उसका सीधा संबंध यूक्रेन युद्ध से है। पूरी दुनिया में सूरजमुखी का जितना उत्पादन होता है, उसमें 60 फीसदी हिस्सा रूस और यूक्रेन का है। ये दोनों देश इस पैदावार के सबसे बड़े निर्यातकों में शामिल हैं। ब्रिटेन में जिन खाद्य तेलों का इस्तेमाल होता है, उनमें सूरजमुखी का तेल चौथे नंबर पर आता है। सिर्फ पाम ऑयल, सोया बीन और रेपसीड के तेल की खपत उससे ज्यादा है।

सूरजमुखी के भाव में 60 फीसदी की बढ़ोतरी

विश्लेषकों का कहना है कि इन चार में किसी भी एक तेल की कमी होने का सभी प्रकार के खाद्य तेलों की कीमत पर असर पड़ता है। यूक्रेन पर रूस की सैनिक कार्रवाई शुरू होने के बाद से विश्व बाजार में सूरजमुखी के भाव में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। युद्ध शुरू हो जाने के कारण निर्यात के लिए रखा गया हजारों टन सूरजमुखी तेल यूक्रेन में फंस गया है। इसका खराब असर न सिर्फ यूरोप, बल्कि एशिया सहित दुनिया भर में देखा जा रहा है।

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ब्रिटेन में तेल की आयातक कंपनी केटीसी एडिबल्स के अधिकारी गैरी लुइस ने अखबार गार्जियन से कहा- ‘सूरजमुखी के भाव का ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन क्षेत्र में रेपसीड पर भी असर पड़ा है। इन खाद्य तेलों के भाव पागलपन की हद तक चढ़ गए हैं।’ बताया जाता है कि अगर यूक्रेन में युद्ध ठहर जाता है, तब भी तुरंत सप्लाई सामान्य नहीं हो सकेगी। यूक्रेन के राष्ट्रपित वोलोदीमीर जेलेंस्की ने कहा है कि युद्धविराम के बाद ही इसका अंदाजा लगाया जा सकेगा कि देश में कितना भंडार सुरक्षित बचा है।

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