पारंपरिक कपड़ों में अफगान महिलाएं
- फोटो : Twitter :@NatashaFatah
तालिबान के ड्रेस कोड के विरोध में अफगान महिलाओं ने एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया। महिलाएं #DoNotTouchMyClothes का इस्तेमाल उपयोग करके पारंपरिक कपड़ों में अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। यह अभियान तालिबान के फरमान के जवाब में चल रहा है। महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान पहने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करके इस अभियान के जरिए यह बताने की कोशिश कर रही हैं कि वे बिना बुर्का पहने स्वतंत्रता महसूस करती हैं।
शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड लागू होने के बाद विरोध शुरू
शिक्षण संस्थानों में महिलाओं के लिए अनिवार्य ड्रेस कोड लागू करने वाली नई तालिबान सरकार के विरोध में यह अभियान चल रहा है। तालिबान के फरमान के बाद दुनिया भर में अफगानिस्तान की महिलाएं पारंपरिक पोशाक में तस्वीरें साझा करके इसके विरोध के लिए प्रेरित हुई हैं। नई तालिबान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा है कि महिलाएं स्नातकोत्तर तक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जारी रख सकती हैं, लेकिन कक्षाओं में उन्हें लड़कों से अलग बैठना होगा और बुर्का पहनना अनिवार्य होगा।
महिलाओं की सिर्फ आंखें दिखें
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला विश्वविद्यालय के छात्रों को अनिवार्य ड्रेस कोड सहित तालिबान के तहत सभी प्रतिबंधों को मानने के लिए कहा गया है। महिलाओं को आंखों को छोड़कर नकाब या बुर्के से पूरे चेहरे को कवर करना जरूरी है। शनिवार को, मीडिया में तस्वीरें सामने आईं थीं जिसमें काबुल में एक सरकारी विश्वविद्यालय के लेक्चर हॉल में छात्राओं का एक समूह सिर से पैर तक काले कपड़े पहने और तालिबान के झंडे लहरा रहा है।
इस फोटो के आने के बाद दुनिया भर में अफगान महिलाओं का गुस्सा भड़क गया है जिसके बाद उन्होंने तालिबान के ड्रेस कोड के विरोध में एक ऑनलाइन अभियान शुरू कर दिया। महिलाएं लगातार सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं जिससे यह अभियान और मजबूत हुआ है। लंदन में स्थित एक प्रमुख बीबीसी पत्रकार सना सफी ने भी रंगीन पारंपरिक पोशाक में अपनी एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है-यदि मैं अफगानिस्तान में होती तो मेरे सिर पर दुपट्टा होता। यह 'रूढ़िवादी' सोच है।