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2024 के राष्ट्रपति चुनाव की तैयारी: अमेरिकी सियासत पर गहराता जा रहा है डोनाल्ड ट्रंप की वापसी का साया

Tue, 05 Oct 2021 06:41 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषकों के मुताबिक ज्यादा चिंता की बात यह है कि रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की पकड़ पूरी तरह बरकरार है। संभावित उम्मीदवारों को जीत के लिए उनका समर्थन पाना महत्वपूर्ण महसूस हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ट्रंप की बातों का समर्थन करने वालों का बहुमत बना हुआ है...
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डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो) - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ताजा गतिविधियों से अमेरिकी राजनीति में नई हलचल मचा दी है। ट्रंप ने अपना ट्विटर अकाउंट बहाल करने के लिए न्यायपालिका की पनाह ली है। इस बीच वे अगले साल होने वाले चुनावों के लिए लगातार रिपब्लिकन पार्टी ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन देने घोषणा कर रहे हैं, जो उनकी इस राय से सहमत हैं कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव जो बाइडन गलत तरीके से जीते। जानकारों का कहना है कि अगर ट्रंप समर्थित उम्मीदवार जीत गए, तो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के फिर से खड़ा होने की राह आसान हो जाएगी। ट्रंप की संभावित उम्मीदवारी अमेरिकी मीडिया में लगातार सुर्खियों में है।

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अगले साल संसदीय चुनाव के साथ राज्यों में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और निर्वाचन अधिकारियों का चुनाव भी होगा। इन पदों के लिए ट्रंप ने कई उम्मीदवारों को अपना समर्थन देने का एलान किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव के समय इन अधिकारियों की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे अधिकारी ब्लैक और अल्पसंख्यक वोटरों के लिए मतदान करना मुश्किल बना सकते हैं, जिन्हें आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थक समझा जाता है। चुनाव नतीजे पर विवाद होने पर उनकी भूमिका और बढ़ जाती है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका कांटे की टक्कर वाले 15 राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी ने जिन उम्मीदवारों को उतारा है, उनमें दस ऐसे हैं, जो मानते हैं कि 2020 के चुनाव में जो बाइडन धांधली के जरिए जीते। विश्लेषकों का कहना है कि 2020 में चुनाव परिणाम को पलटवाने की मुहिम में ट्रंप इसलिए नाकाम हो गए, क्योंकि तब ज्यादातर राज्यों में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और चुनाव अधिकारियों ने उनका साथ नहीं दिया। इसलिए अब उन्होंने उन पदों पर अपने लोगों को बैठाने की रणनीति अपनाई है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में चुनाव कानूनों के विशेषज्ञ रिचर्ड हासेन ने अखबार द गार्जियन से कहा- ‘यह सचमुच बहुत परेशान करने वाली बात है कि अहम पदों पर ऐसे लोग पहुंच जाएं, जो मानते हैं कि ट्रंप को 2020 में गलत तरीके से हराया गया। ये बात झूठ है, लेकिन इस झूठ में यकीन करने वाले लोग ही अब निर्णायक पदों पहुंच सकते हैं।’

कॉलोराडो राज्य में मुख्य चुनाव अधिकारी जेना ग्रीसवॉल्ड ने कहा- ‘डोनाल्ड ट्रंप ने अपना मकसद यह बना लिया है कि लोगों के दिमाग में अमेरिकी लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा किया जाए। अब वे सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के लिए ऐसे लोगों का समर्थन कर रहे हैं, जो एक बड़े झूठ में यकीन करते हैं। इसका भविष्य में चुनाव नतीजे तय करने पर बड़ा असर पड़ सकता है। जबकि हमें ऐसे चुनाव प्रशासकों की जरूरत है, जो जनादेश का सम्मान करें, भले चुनाव नतीजा किसी के पक्ष में हो।’

विश्लेषकों के मुताबिक ज्यादा चिंता की बात यह है कि रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की पकड़ पूरी तरह बरकरार है। संभावित उम्मीदवारों को जीत के लिए उनका समर्थन पाना महत्वपूर्ण महसूस हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ट्रंप की बातों का समर्थन करने वालों का बहुमत बना हुआ है। हाल में टीवी चैनल सीएनएन के सर्वे से सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े 74 फीसदी लोग ये मानते हैं कि 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन चुनाव नहीं जीते थे। उन्होंने सर्वे में कहा कि बाइडन चुनाव हार गए थे, इसके ठोस सबूत हैं। हालांकि उन्होंने ऐसे किसी साक्ष्य का उल्लेख करने से इनकार किया।
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