यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में चुनाव कानूनों के विशेषज्ञ रिचर्ड हासेन ने अखबार द गार्जियन से कहा- ‘यह सचमुच बहुत परेशान करने वाली बात है कि अहम पदों पर ऐसे लोग पहुंच जाएं, जो मानते हैं कि ट्रंप को 2020 में गलत तरीके से हराया गया। ये बात झूठ है, लेकिन इस झूठ में यकीन करने वाले लोग ही अब निर्णायक पदों पहुंच सकते हैं।’
कॉलोराडो राज्य में मुख्य चुनाव अधिकारी जेना ग्रीसवॉल्ड ने कहा- ‘डोनाल्ड ट्रंप ने अपना मकसद यह बना लिया है कि लोगों के दिमाग में अमेरिकी लोकतंत्र को लेकर संदेह पैदा किया जाए। अब वे सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के लिए ऐसे लोगों का समर्थन कर रहे हैं, जो एक बड़े झूठ में यकीन करते हैं। इसका भविष्य में चुनाव नतीजे तय करने पर बड़ा असर पड़ सकता है। जबकि हमें ऐसे चुनाव प्रशासकों की जरूरत है, जो जनादेश का सम्मान करें, भले चुनाव नतीजा किसी के पक्ष में हो।’
विश्लेषकों के मुताबिक ज्यादा चिंता की बात यह है कि रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप की पकड़ पूरी तरह बरकरार है। संभावित उम्मीदवारों को जीत के लिए उनका समर्थन पाना महत्वपूर्ण महसूस हो रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ट्रंप की बातों का समर्थन करने वालों का बहुमत बना हुआ है। हाल में टीवी चैनल सीएनएन के सर्वे से सामने आया कि रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े 74 फीसदी लोग ये मानते हैं कि 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन चुनाव नहीं जीते थे। उन्होंने सर्वे में कहा कि बाइडन चुनाव हार गए थे, इसके ठोस सबूत हैं। हालांकि उन्होंने ऐसे किसी साक्ष्य का उल्लेख करने से इनकार किया।