अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में अमेरिका का वैश्विक नेतृत्व बनाए रखने के लिए एक नई "सुपर इंटेलिजेंस फोर्स" यानी एसआईएफ के गठन की घोषणा की है। व्हाइट हाउस की यह टास्क फोर्स संघीय सरकार के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रयासों के बीच समन्वय का काम करेगी। इसकी अगुवाई राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन करेंगे।
ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में इस नई फोर्स के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका "सुपर इंटेलिजेंस" के क्षेत्र में दुनिया में अपनी बढ़त बनाए रखे और साथ ही अमेरिकी हितों की रक्षा हो।
क्या करेगी सुपर इंटेलिजेंस फोर्स?
ट्रंप ने लिखा, "सुपर इंटेलिजेंस पर ऐतिहासिक व्हाइट हाउस समझौते के बाद, जिसमें दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी कंपनियां एक साथ आईं और अमेरिकी लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों की पुष्टि की, मैं सुपर इंटेलिजेंस फोर्स के गठन की घोषणा कर रहा हूं।"
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि एसआईएफ का काम संघीय सरकार के उन प्रयासों में समन्वय करना होगा, जिनके जरिये यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमेरिका सुपर इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करता रहे। ट्रंप ने कहा कि कई लोग सुपर इंटेलिजेंस को औद्योगिक क्रांति और इंटरनेट से भी बड़ा बदलाव मानते हैं। उनके अनुसार, नई फोर्स अमेरिकी हितों की रक्षा करने और सभी अमेरिकियों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
किन क्षेत्रों के साथ समन्वय करेगी फोर्स?
ट्रंप के अनुसार, सुपर इंटेलिजेंस फोर्स संघीय सरकार के उपभोक्ताओं, जनहित समूहों, धार्मिक संगठनों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और सुपर इंटेलिजेंस कंपनियों के साथ संपर्क और समन्वय को व्यवस्थित करेगी।
कौन करेगा सुपर इंटेलिजेंस फोर्स का नेतृत्व?
इस फोर्स का नेतृत्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन करेंगे। उनके साथ संघीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष एंड्रयू फर्ग्यूसन, युद्ध विभाग में अनुसंधान एवं इंजीनियरिंग के अवर सचिव और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एमिल माइकल तथा कार्मिक प्रबंधन कार्यालय के निदेशक स्कॉट कुपोर भी इसमें शामिल होंगे।
ट्रंप ने कहा कि फोर्स अमेरिकी राष्ट्रपति और चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स को रिपोर्ट करेगी। नई फोर्स का गठन ऐसे समय में किया गया है जब अमेरिकी प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर संघीय सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच समन्वय पर जोर दिया है। ट्रंप ने अपने बयान में सुपर इंटेलिजेंस को अमेरिका के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र के रूप में पेश किया।