शादी के तीन साल बाद ट्रंप ने अपनी पहली खास जायदाद खड़ी की। उन्होंने न्यूयॉर्क में द ग्रैंड हयात न्यूयॉर्क होटल खोला। होटल के लिए उन्होंने 200 टेलीविजन सेट सोवियत संघ छोड़कर आए कारोबारी सिमयोन किसलिन से खरीदी। किसलिन ने जॉय- लुड नाम के कारोबारी के साथ मिल कर फिफ्थ एवेन्यू नाम की कंपनी शुरू की थी।
श्वेत्स का दावा है कि जॉल-लुड केजीबी के लिए काम करता था। किसलिन को उसने ऐसे लोगों की पहचान के काम में लगा रखा था, जिन्हें केजीबी अपनी सेवा में ले सके। श्वेत्स के मुताबिक ट्रंप की संभावित स्रोत के रूप में पहचान किसलिन ने ही की। वैसे किसलिन ने इस आरोप का खंडन किया है कि उसका केजीबी से कोई संबंध था।
श्वेत्स का कहना है कि जब ट्रंप ने 1987 में पहली बार अपनी पत्नी इवाना के साथ मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग की यात्रा की, तब केजीबी के एजेंटों ने उनकी खूब आवभगत की। इसी दौरान उन्होंने ट्रंप के दिमाग में ये विचार डाला कि उन्हें राजनीति में आना चाहिए। श्वेत्स का कहना है कि इस दौरान केजीबी ने ट्रंप के व्यक्तित्व के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी कर ली।
वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ट्रंप बौद्धिक और मनोवैज्ञानिक रूप से एक कमजोर व्यक्ति हैं और चापलूस उन्हें खूब रास आते हैं। इन एजेंटों ने ट्रंप की खूब तारीफ की और ये कहा कि आप जैसे व्यक्ति को अमेरिका का राष्ट्रपति होना चाहिए। आगे चल कर केजीबी ने ट्रंप की इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाया।
साल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में ट्रंप की जीत पर मास्को में खूब खुशी मनाई गई थी। अमेरिका में ट्रंप और रूस के बीच रिश्तों की जांच कराई गई थी। ये जांच विशेष वकील रॉबर्ड मूलर की अध्यक्षता में हुई। लेकिन इसमें आरोप की पुष्टि नहीं हो सकी। श्वेत्स का कहना है कि मूलर रिपोर्ट निराशाजनक थी। उनका कहना है कि मूलर रिपोर्ट से कहीं अधिक जानकारियां क्रेग अंगेर की किताब से सामने आएंगी।
अंगर का कहना है कि वे यह नहीं कहना चाहते कि ट्रंप रूसियों के हाथ की कठपुतली थे। ये साजिश इतनी बड़ी नहीं थी कि रूसी एजेंटों ने 40 साल की तैयारी के बाद ट्रंप को राष्ट्रपति बनवा दिया।
लेकिन इस कहानी से यह जरूर साफ होता है कि रूसी अपने माफिक लोगों की तलाश में रहते थे। ट्रंप जैसा आत्ममुग्ध व्यक्ति स्वाभाविक रूप से उनके निशाने पर आ गया, जिससे उन्होंने 40 साल से संपर्क बना रखा था।