इस सम्मेलन ने लिए राष्ट्रपति शी ने अपना लिखित संदेश भेजा था। उसमें उन्होंने वादा किया कि चीन दूसरे देशों के साथ मिल कर डिजिटल अर्थव्यवस्था में गति लाने, डिजिटल सिक्योरिटी को मजबूत करने और डिजिटल शासन को अधिक कुशल बनाने के लिए काम करेगी। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन में विश्व इंटरनेट सम्मेलन 2014 के बाद से हर साल होता रहा है। लेकिन इस बार इसमें मीडिया और पर्यवेक्षकों की जितनी दिलचस्पी रही, उतने पहले देखने को नहीं मिली है।
अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चीन में कारोबार करने वाली कोई ऐसी बड़ी कंपनी नहीं है, जिसने इस बार अपना प्रतिनिधि इस सम्मेलन में न भेजा हो। पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये सम्मेलन अब ऐसा मंच बन गया है, जिसके जरिए चीन सरकार विश्व इंटरनेट संचालन के बारे में अपने विचार दुनिया को बताती है। चीन सरकार ने ‘साइबर संप्रभुता’ का एक विचार प्रचारित किया है, जिसके जरिए वह देश में जारी इंटरनेट सेंसरशिप को जायज ठहराती है। सरकार के डंडे का डर कंपनियों में ऐसा समाया हुआ है कि उनके किसी अधिकारी ने सम्मेलन में इस सेंसरशिप के खिलाफ आवाज नहीं उठाई।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल कोरोना महामारी के कारण इस सम्मेलन में ज्यादातर चर्चा ऑनलाइन हुई थी। लेकिन इस बार सरकार की मंशा को देखते हुए ज्यादातर कंपनियों के सीईओ व्यक्तिगत रूप से सम्मेलन में हाजिर हुए।