ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन उन मामलों को कहा जाता है, जिनमें कोरोना वैक्सीन ले चुके लोग संक्रमित हो जाते हैं। प्रो. आल्टमैन ने कहा- ‘सबसे चिंता की बात नए वैरिएंट्स का व्यवहार है। अभी सामने डेल्टा वैरिएंट है, लेकिन भविष्य में और भी ऐसे वैरिएंट सामने आएंगे।’ विशेषज्ञों के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट इसके पहले सामने आए वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक है। ईसीडीसी का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक कोरोना संक्रमण के जितने मामले ईयू में होंगे, उनमें 90 फीसदी का कारण डेल्टा वैरिएंट होगा।
प्रो. आल्टमैन ने कहा- ‘गर्मियों में डेल्टा वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। खासकर उन युवाओं में उसका संक्रमण हो रहा है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। जिन लोगों ने टीके का एक डोज लिया है, दुर्भाग्यवश वे इससे संक्रमित हो रहे हैं। अभी मौजूद किसी वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों को जरूर अधिक सुरक्षा मिली हुई है। ये सुरक्षा उन्हें हर वैरिएंट से मिलती है।’
गौरतलब है कि ईयू और ईईए क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी आबादी है, जिसे वैक्सीन नहीं लगी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी लोगों का पूरा टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोरोना से बचाव संबंधी प्रतिबंधों का सबको पालन करना चाहिए। डेल्टा वैरिएंट के प्रसार को रोकने का यही एकमात्र तरीका है।
यूरोप में सबसे ज्यादा चिंता ब्रिटेन के हालात से पैदा हुई है। ब्रिटेन यूरोप के उन देशों में है, जहां सबसे ज्यादा लोगों का टीकाकरण हुआ है। लेकिन इस महीने वहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस बीच राहत की बात सिर्फ यह है कि इस बार पहले की तरह लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आ रही है। मौतों का अनुपात भी कम है। ब्रिटेन के इस हाल के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है। वह संक्रमित होने, संक्रमण फैलाने, संक्रमण के गंभीर लक्षणों आदि से बचाव करता है।