विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि वेंडी शरमन की यात्रा को पूर्ण आधिकारिक यात्रा का दर्जा नहीं दिया गया है। लेकिन चीन सरकार ने एक बयान में कहा है कि वे चीन के उप विदेश मंत्री शी फेंग से बातचीत करेंगी, जबकि उनकी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी। उधर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वेंडी शरमन चीन से संबंधित उन मुद्दों पर बात करेंगी, जिन्हें लेकर अमेरिका चिंतित है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा– ‘ये वार्ताएं चीन के अधिकारियों के साथ दो टूक संवाद करने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा हैं, ताकि अमेरिकी हित और मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को जिम्मेदारी के साथ संभाला जा सके।’
उधर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन अमेरिकी पक्ष के सामने चीन-अमेरिका संबंधों को विकसित करने के बारे में अपने सिद्धांत और रुख स्पष्ट करेगा। इसके अलावा वह अमेरिकी पक्ष को बताएगा कि चीन अपनी संप्रभुता और विकास संबंधी अपने हितों की रक्षा करने के लिए कृत-संकल्प है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयानों में नरमी का कोई संकेत नहीं है। दरअसल, बीते एक हफ्ते में दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हुए हैं। पिछले हफ्ते बाइडन प्रशासन ने अमेरिकी कारोबारियों को हांगकांग में कारोबार करने से जुड़े जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। इसी हफ्ते उसने आरोप लगाया कि चीन अमेरिका में साइबर हमले कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि इस साल माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के ई-मेल सर्वर पर हुए हमले में चीन सरकार से समर्थन प्राप्त एजेंसियां शामिल थीं।
इस माहौल में बातचीत से ज्यादा कुछ हासिल होगा, चीनी पर्यवेक्षकों को इसकी उम्मीद नहीं है। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना में अमेरिकन स्टडीज सेंटर के निदेशक शी यिंगहोंग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा- बातचीत में संवेदनशील मुद्दे उठेंगे। उन पर दोनों देश अपने बुनियादी रुख दोहराएंगे। चाहे शिनजियांग हो या हांगकांग या ताइवान- इन मुद्दों पर दोनों पक्ष अपने रुख पर अडिग रहेंगे। इसलिए ये वार्ता से संपर्क बनाए रखने के अलावा और कुछ नहीं हासिल होगा।