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दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव: क्या कुछ ठोस हासिल होगा अमेरिकी मंत्री की चीन यात्रा से?

Fri, 23 Jul 2021 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि वेंडी शरमन की यात्रा को पूर्ण आधिकारिक यात्रा का दर्जा नहीं दिया गया है। लेकिन चीन सरकार ने एक बयान में कहा है कि वे चीन के उप विदेश मंत्री शी फेंग से बातचीत करेंगी, जबकि उनकी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी...
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यूएस और चीन का झंडा - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमन की चीन यात्रा को लेकर इस समय कूटनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन चीन ने इस यात्रा से ज्यादा उम्मीद नहीं जोड़ी हैं। शरमन उत्तरी चीन में स्थित तियानजिन शहर आएंगी, वहां रविवार और सोमवार को उनकी चीन के विदेश मंत्री वांग यी और उप विदेश मंत्री शी फेंग से मुलाकात होगी। लेकिन चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि चीनी पक्ष इस यात्रा से ज्यादा उम्मीद नहीं रख रहा है। उसके मुताबिक यह यात्रा अमेरिका की चीन के साथ संपर्क बनाए रखने की नीति के तहत हो रही है। लेकिन इस दौरान कोई ठोस प्रगति नहीं होगी।

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ये यात्रा अमेरिका और चीन में बढ़ते जा रहे तनाव के बीच हो रही है। विश्लषकों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के जलवायु परिवर्तन संबंधी दूत जॉन केरी की अप्रैल में हुई चीन यात्रा के बाद दोनों देशों में संवाद का पहला बड़ा मौका होगा। जहां तक कूटनीतिक वार्ता का संबंध है, तो मार्च में अमेरिकी राज्य अलास्का में दोनों देशों के बीच हुई मुलाकात के बाद ये पहली बड़ी बातचीत का मौका है। अलास्का में दोनों पक्षों की बातचीत अधिक ऊंचे स्तर पर हुई थी। लेकिन उससे तनाव और बढ़ गया था।

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि वेंडी शरमन की यात्रा को पूर्ण आधिकारिक यात्रा का दर्जा नहीं दिया गया है। लेकिन चीन सरकार ने एक बयान में कहा है कि वे चीन के उप विदेश मंत्री शी फेंग से बातचीत करेंगी, जबकि उनकी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात होगी। उधर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वेंडी शरमन चीन से संबंधित उन मुद्दों पर बात करेंगी, जिन्हें लेकर अमेरिका चिंतित है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा– ‘ये वार्ताएं चीन के अधिकारियों के साथ दो टूक संवाद करने के अमेरिकी प्रयासों का हिस्सा हैं, ताकि अमेरिकी हित और मूल्यों को आगे बढ़ाया जा सके। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को जिम्मेदारी के साथ संभाला जा सके।’

उधर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन अमेरिकी पक्ष के सामने चीन-अमेरिका संबंधों को विकसित करने के बारे में अपने सिद्धांत और रुख स्पष्ट करेगा। इसके अलावा वह अमेरिकी पक्ष को बताएगा कि चीन अपनी संप्रभुता और विकास संबंधी अपने हितों की रक्षा करने के लिए कृत-संकल्प है।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयानों में नरमी का कोई संकेत नहीं है। दरअसल, बीते एक हफ्ते में दोनों देशों के संबंध और तनावपूर्ण हुए हैं। पिछले हफ्ते बाइडन प्रशासन ने अमेरिकी कारोबारियों को हांगकांग में कारोबार करने से जुड़े जोखिमों के बारे में चेतावनी दी। इसी हफ्ते उसने आरोप लगाया कि चीन अमेरिका में साइबर हमले कर रहा है। अमेरिकी बयान में कहा गया कि इस साल माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के ई-मेल सर्वर पर हुए हमले में चीन सरकार से समर्थन प्राप्त एजेंसियां शामिल थीं।

इस माहौल में बातचीत से ज्यादा कुछ हासिल होगा, चीनी पर्यवेक्षकों को इसकी उम्मीद नहीं है। रेनमिन यूनिवर्सिटी ऑफ चाइना में अमेरिकन स्टडीज सेंटर के निदेशक शी यिंगहोंग ने ग्लोबल टाइम्स से कहा- बातचीत में संवेदनशील मुद्दे उठेंगे। उन पर दोनों देश अपने बुनियादी रुख दोहराएंगे। चाहे शिनजियांग हो या हांगकांग या ताइवान- इन मुद्दों पर दोनों पक्ष अपने रुख पर अडिग रहेंगे। इसलिए ये वार्ता से संपर्क बनाए रखने के अलावा और कुछ नहीं हासिल होगा।
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