दिल्ली के उद्यमी विद्युत मोहन।
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दिल्ली के एक उद्यमी विद्युत मोहन को फसल अवशेषों को बिक्री योग्य जैव उत्पादों में बदलने की परियोजना के लिए लंदन में एक समारोह में सम्मानित किया गया। उन्हें प्रिंस विलियम द्वारा शुरू किए गए पहले पर्यावरणीय ‘अर्थशॉट पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार को ‘इको ऑस्कर’ भी कहा जा रहा है। उनकी कृषि उपशिष्टों को रिसाइकल करने की परियोजना ‘टकाचार’ को इनाम स्वरूप 10 लाख ब्रिटिश पाउंड (10.34 करोड़ रुपये) दिए गए।
विद्युत मोहन के नेतृत्व वाली ‘टकाचार’ परियोजना को फसलों के अवशेषों को बिक्री योग्य जैव उत्पादों में बदलने की नवोन्मेषी किफायती तकनीक के लिए ‘हमारी स्वच्छ वायु’ की श्रेणी में विजेता घोषित किया गया है। ड्यूक ऑफ कैम्ब्रिज विलियम ने पृथ्वी को बचाने की कोशिश करने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए यह पुरस्कार शुरू किया है। विद्युत मोहन दुनियाभर में इस पुरस्कार के पांच विजेताओं में से एक हैं।
विलियम ने समारोह में पहले से रिकॉर्ड किए गए एक संदेश में कहा, समय बीता जा रहा है। एक दशक काफी लंबा नहीं लगता लेकिन मानव जाति के पास ऐसी समस्याओं का हल निकालने की क्षमता का उत्कृष्ट रिकॉर्ड है जिसका समाधान मुश्किल हो। इस समारोह में कई हस्तियां शामिल हुईं और गायक एड शीरन तथा कॉल्डप्ले ने प्रस्तुति दी।
धुएं का उत्सर्जन 98 फीसद तक घटाती है ‘टाकाचर’ तकनीक
विद्युत मोहन की अगुआई वाली ‘टकाचार’ को उस तकनीक के लिए पुरस्कृत किया गया है जो धुएं का उत्सर्जन 98 प्रतिशत तक कम करती है जिसका मकसद वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। अगर इस तकनीक का उपयोग किया जाता है कि इससे एक साल में एक अरब टन तक कार्बन डाइऑक्साइड की कटौती हो सकती है और इसे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भारतीय किसानों के लिए जीत बताया जा रहा है। अर्थशॉट पुरस्कार के दौरान कहा गया कि टाकाचर ने किफायती, छोटे पैमाने पर, लाने ले जाने में आसान तकनीक विकसित है जो दूरवर्ती खेतों में ट्रैक्टरों से जोड़ी जाती है।
अपशिष्ट फसल के विनाशकारी नतीजे
कार्यक्रम में कहा गया कि दुनियाभर में हर साल हम 120 अरब डॉलर का कृषि अपशिष्ट पैदा करते हैं। किसान जो बेच नहीं पाते उसे अक्सर जला देते हैं जिसके मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण पर विनाशकारी नतीजे होते हैं। विद्युत मोहन का सामाजिक उद्यम टकाचार इस धुएं को कम करने की कोशिश कर रहा है।