अफगानिस्तान पर कब्जा कर चुके तालिबान आतंकियों के कब्जे में अमेरिकी सैन्य संसाधन आ ही चुके हैं, अब आशंका है कि उनके पास ‘हाइड’ नामक एक उपकरण से जमा किया गया अमेरिका के मददगार रहे अफगान नागरिकों का डाटा भी पहुंच गया है।
रोहिंग्याओं के लिए भी खतरा बना यह डाटा
यूएनएचसीआर ने 2018 में रोहिंग्या शरणार्थियों का बायोमीट्रिक डाटा जमा किया। बाद में इसे बांग्लादेश सरकार को सौंप दिया। बांग्लादेश ने यही डाटा म्यांमार को सौंप दिया जहां से हजारों रोहिंग्या जान बचाकर भागे थे। कहा जा रहा है कि अब इन शरणार्थियों पर भी अफगान नागरिकों की तरह ही मौत का खतरा बना रहेगा।
मई 2021 में मानव विज्ञानी नीना टॉफ्ट जानेगरा ने बताया था कि अमेरिकी सेना ने हाइड का उपयोग इराक में किया था। अपदस्थ गनी सरकार भी इसी रास्ते पर चलते हुए अपने नागरिकों के राष्ट्रीय पहचान पत्र बना रही थी।