फाइजर टीके के क्लिनिकल परीक्षण को दूसरी खुराक के एक सप्ताह से अधिक समय बाद इसके असर का परीक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया था। इसने शुरू में ऐसे संकेत भी दिए कि पहली खुराक 12 दिन बाद कुछ सुरक्षा प्रदान कर सकती है। शोध और रिपोर्ट्स बताती हैं कि पहली खुराक संक्रमण को रोकने में 50 से 90 फीसदी तक प्रभावी हो सकती है। जो लोग फाइजर वैक्सीन की एक खुराक के बाद संक्रमित हो जाते हैं, उनके घर के अन्य सदस्यों तक उससे संक्रमण पहुंचने की आशंका 50 फीसदी तक कम होती है।
ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को शुरू में एक खुराक वाले टीके के रूप में विकसित किया गया था, जिसका नैदानिक परीक्षणों में रोग के खिलाफ 76 फीसदी तक प्रभावी होने का अनुमान है। इन परीक्षणों को, बाद में दूसरी खुराक को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया जब टीके की दूसरी खुराक के बाद शरीर में एंटीबॉडी के स्तर में काफी वृद्धि दिखाई दी। फाइजर की तरह ही, एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की एक खुराक चार सप्ताह बाद अस्पताल में भर्ती होने के खिलाफ बहुत अच्छी सुरक्षा प्रदान करती है।
फाइजर जैसी एमआरएनए वैक्सीन और एस्ट्राजेनेका जैसी वायरल वेक्टर वैक्सीन में अंतर के बावजूद, दोनों एंटीबॉडी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में समान समय लेती हैं। एस्ट्राजेनेका की एक खुराक के 14 दिन बाद एंटीबॉडी का पता लगाया जा सकता है और यह अगले दो हफ्तों में और बढ़ सकती है। लेकिन इन प्रतिक्रियाओं को विकसित होने में समय क्यों लगता है? शोधकर्ताओं के अनुसार प्रतिरक्षा प्रणाली पहली खुराक लेने के कम से कम 10 दिन में एंटीबॉडी बनाना शुरू करती है, जो वायरस के स्पाइक प्रोटीन को पहचान सके।
टी कोशिकाओं को भी टीके पर प्रतिक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय लगता है। टी कोशिकाएं एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इसके विपरीत, वैक्सीन की दूसरी खुराक हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को और अधिक तेजी से सक्रिय करती है। टीके की दूसरी खुराक लेने के एक सप्ताह के भीतर, आपके एंटीबॉडी का स्तर दस गुना से अधिक बढ़ जाता है, जो संक्रमण से अधिक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला संरक्षण प्रदान करता है।
किसी भी टीके की पहली खुराक कुछ लाभ प्रदान करती है, लेकिन उन लोगों के लिए आंशिक टीकाकरण पर निर्भर रहना समस्या पैदा कर सकता है जो कमजोर हैं या अधिक जोखिम में हैं। वहीं, कुछ शोध में यह भी सामने आया है कि कोरोना वायरस के कुछ नए प्रकारों पर टीकों का असर कुछ कम होता है, खासकर इसकी केवल एक खुराक के बाद। टीके की पहली खुराक आपकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बनाए रखती है, लेकिन दूसरी खुराक यह सुनिश्चित करती है कि प्रतिरक्षा मजबूत हो और लंबे समय तक चल सके।