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इंडोनेशिया में कोरोनाः अस्पतालों में बेड खाली, लेकिन घर पर मरने को मजबूर हैं मरीज

Sat, 14 Aug 2021 10:23 PM IST
कुमार संभव डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, जकार्ता

सार

कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के कारण इंडोनेशिया में पिछले महीने महामारी की खतरनाक लहर देखने को मिली थी। उस दौरान यहां अस्पताल व्यवस्था चरमरा गई। ऐसे में सरकार ने अस्पताल में बेड उपलब्ध होने तक पॉजिटिव मरीजों को घर पर पृथकवास में रहने की सलाह दी। यह नीति अब तक जारी है।
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कोरोना का कहर - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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इंडोनेशिया में अस्पतालों पर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का अब वैसा दबाव नहीं है, जैसा जुलाई में देखने को मिला था। इसके बावजूद देश भर से मिल रही खबरों के मुताबिक, यहां मौजूद मरीजों की मौत अपने ही घर में हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया के अस्पतालों में अब बेड खाली पड़े हैं, लेकिन लोग इन सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आ ही नहीं रहे। 

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कोरोना संक्रमण की स्थिति पर निगाह रखने वाली एक गैर-सरकारी संस्था लेपॉरकोविड-19 के मुताबिक, इस महीने रोजाना करीब 50 मरीजों की मौत अपने-अपने घरों में हुई, जिनकी गिनती सरकारी तौर पर बताई गई संख्या में शामिल नहीं है। इस संस्था का दावा है कि वह अपने स्रोतों से इस बारे में जानकारी इकट्ठा करती है। जुलाई में रोजाना मरने वाले मरीजों की संख्या 2,400 तक पहुंच गई थी। लेपॉरकोविड-19 के डाटा विश्लेषक फरीज इबान का कहना है कि जो संख्या सरकार बताती है, वह असल संख्या से बहुत कम है।

लेपॉरकोविड-19 के मुताबिक, जुलाई के दौरान ज्यादातर मौतें जकार्ता में हो रही थीं। जकार्ता की स्थानीय सरकार देश में अकेला ऐसा प्रशासन है, जो कोविड-19 से घरों में होने वाली मौतों की भी गिनती करता है। इंडोनेशिया का स्वास्थ्य मंत्रालय घर पर मरने वाले मरीजों का रिकॉर्ड नहीं रखता। यह बात मंत्रालय की प्रवक्ता सिति नादिया तरमिजी ने भी अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से बातचीत में मानी। उन्होंने कहा था कि सरकार के निर्देशानुसार लोगों को अपने घर पर आइसोलेशन में तब तक रहना चाहिए, जब तक उनमें गंभीर लक्षण न दिखें। गंभीर लक्षण दिखते ही उन्हें अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। 
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अब इंडोनेशिया के मेडिकल असोसिएशन ने सरकार से यह नीति बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घर पर आइसोलेशन की नीति के कारण काफी मरीज मेडिकल देखभाल से वंचित हो गए, जिसके चलते संक्रमण लगातार फैल रहा है। बता दें कि कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के कारण इंडोनेशिया में पिछले महीने महामारी की खतरनाक लहर देखने को मिली थी। उस दौरान यहां अस्पताल व्यवस्था चरमरा गई। ऐसे में सरकार ने अस्पताल में बेड उपलब्ध होने तक पॉजिटिव मरीजों को घर पर पृथकवास में रहने की सलाह दी। यह नीति अब तक जारी है। इसी बीच पिछले महीने सरकार ने कुछ नए अस्थायी अस्पताल और आइसोलेशन सेंटर बनाए। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब 30 हजार से ज्यादा बेड उपलब्ध हैं।

इसके बावजूद सरकारी अधिकारी यही सलाह देते रहे हैं कि साधारण लक्षण वाले लोग घर पर ही रहें। इसे देखते हुए इंडोनेशियन मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. दायेंग एम फकीह ने सीएनएन से कहा, 'हम कह रहे हैं कि सरकार घर पर आइसोलेशन के बारे में अपनी नीति बदले। मरीजों को एक जगह पर लाकर आइसोलेट किया जाना चाहिए। इंडोनेशिया में आम तौर पर लोग भीड़-भाड़ वाली जगह पर रहते हैं। ऐसे में संक्रमण पर काबू पाना मुश्किल बना हुआ है।'

इंडोनेशिया में जुलाई की तुलना में अब संक्रमण के नए मामले घट गए हैं, लेकिन पूरी दुनिया में सबसे ऊंची मृत्यु दर यहां पर ही है। यहां रोज करीब 1,500 लोगों की मौत हो रही है, जबकि भारत में यह संख्या 500 और अमेरिका में 350 से कम हो चुकी है। जानकारों का कहना है कि इंडोनेशिया में मरने वालों की जो संख्या बताई जा रही है, वह अस्पतालों में जान गंवाने वालों की है। घरों में जिन लोगों की मौत हो रही है, उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

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