प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में सीओपी-26 जलवायु शिखर सम्मेलन में एक बार फिर बड़े देशों को चेताया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि हमें प्रकृति से तालमेल बिठाकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाया गया है। मानवता को बचाने के लिए हमें सूर्य के साथ चलना होगा।
वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रीड दुनिया के लिए जरूरी
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रीड' दुनिया के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि तकनीक ने हमें बेहतर अवसर दिया है। पीएम मोदी ने कहा कि इसरो विश्व को सोलर कैलकुलेटर देने जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन के उपयोग ने कुछ देशों को समृद्ध तो बनाया लेकिन इसने पृथ्वी और पर्यावरण को खराब बना दिया। उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन की दौड़ ने भू-राजनीतिक तनाव को पैदा किया।
सौर ऊर्जा पूरी तरह से स्वच्छ
ग्लासगो में प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि सौर ऊर्जा पूरी तरह से स्वच्छ और टिकाऊ है। चुनौती यह है कि यह ऊर्जा केवल दिन के समय उपलब्ध होती है और मौसम पर निर्भर करती है। 'वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' इस समस्या का समाधान है। विश्वव्यापी ग्रिड के माध्यम से, स्वच्छ ऊर्जा को कहीं भी और कभी भी प्रेषित किया जा सकता है।
वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' सौर परियोजनाओं की व्यवहार्यता को बढ़ाएगा
वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड' न केवल भंडारण की जरूरतों को कम करेगा बल्कि सौर परियोजनाओं की व्यवहार्यता को भी बढ़ाएगा। यह रचनात्मक पहल न केवल कार्बन फुटप्रिंट्स और ऊर्जा लागत को कम करेगी बल्कि विभिन्न देशों और क्षेत्रों के बीच सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोलेगी।
हमने प्राकृतिक संतुलन से छेड़छाड़ की
पृथ्वी पर जब से जीवन उत्पन्न हुआ, तभी से सभी प्राणियों का जीवन चक्र, उनकी दिनचर्या सूर्य के उदय और अस्त से जुड़ी रही है। जब तक यह प्राकृतिक कनेक्शन बना रहा तब तक हमारा ग्रह भी स्वस्थ रहा, लेकिन आधुनिक काल में मनुष्य ने सूर्य द्वारा स्थापित चक्र से आगे निकलने की होड़ में प्राकृतिक संतुलन से छेड़छाड़ की और अपने पर्यावरण का बड़ा नुकसान भी कर लिया।
हमें फिर से सूरज के साथ चलना होगा
अगर हमें फिर से प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संबंध स्थापित करना है तो इसका रास्ता हमारे सूर्य से ही प्रकाशित होगा। मानवता के भविष्य को बचाने के लिए हमें फिर से सूरज के साथ चलना होगा। जितनी ऊर्जा पूरी मानव जाति सालभर में उपयोग करती है, उतनी ऊर्जा सूर्य एक घंटे में धरती को देता है। ये अपार ऊर्जा पूरी तरह स्वच्छ और सतत है।