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कॉप26: बूढ़े नेता कर रहे युवाओं की धरती के भविष्य का फैसला, विश्व नेताओं पर बरसा युवा-महिला पर्यावरण कार्यकर्ताओं का गुस्सा

Mon, 08 Nov 2021 06:58 AM IST
देव कश्यप न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज़ सर्विस, ग्लासगो।

सार

युवा सड़कों पर खड़े होकर इन नेताओं के गैर गंभीर रुख पर विरोध जताते रहे। पर्यावरण रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे इन युवाओं ने बेबसी भी जताई कि बुजुर्ग राजनेता केवल बातें करके समय खराब कर रहे हैं, उनके भविष्य के लिए वे न गंभीर हैं न सख्त कदम उठा रहे हैं।
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ग्लासगो में सड़कों पर उतरे एक लाख से ज्यादा लोग - फोटो : PTI
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विस्तार
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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में पिछले हफ्ते 130 राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री साथ बैठे। पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे खतरों पर चर्चा की। करीब 100 साल पुराने बरोक्स म्यूजियम में ग्रुप फोटो भी करवाई। इन राजनेताओं की औसत उम्र 60 साल थी और इनमें केवल 10 महिलाएं थी। उन्होंने उस पृथ्वी को लेकर कई निर्णय लिए, जो भविष्य में 18-20 साल के युवाओं को संभालनी है।

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वहीं युवा सड़कों पर खड़े होकर इन नेताओं के गैर गंभीर रुख पर विरोध जताते रहे। पर्यावरण रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे इन युवाओं ने बेबसी भी जताई कि बुजुर्ग राजनेता केवल बातें करके समय खराब कर रहे हैं, उनके भविष्य के लिए वे न गंभीर हैं न सख्त कदम उठा रहे हैं।

इस अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान सर्वशक्तिमान विश्व नेताओं और वे जिनका भविष्य दांव पर है, उन दोनों के बीच बड़ी खाई नजर आई। अधिकतर युवाओं ने विरोध के दौरान गुस्से से बताया, बुजुर्ग नेता साल 2030 से पहले का कोई लक्ष्य ही तय नहीं कर रहे! अधिकतर लक्ष्य 2060 और 2070 के हैं। तब तक हम खुद बूढ़े हो चुके होंगे। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे चाहते हैं, "जीवाश्म ईंधन का उपयोग तत्काल रुके। पर्यावरण को नुकसान तत्काल रोका जाए।"
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बातों में बेकार हो गए 27 साल
22 वर्षीय डोमिनिक पालमर ने कहा, बदलाव का समय अभी है, काम करने की जरूरत आज है। अधिकतर कार्यकर्ता  पैदा भी नहीं हुए थे तब से ये नेता जलवायु परिवर्तन पर बातें कर रहे हैं।। 27 साल पहले जलवायु समिट हुई थी और आज कह रहे हैं कि हमारे पास जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए केवल 10 साल और हैं। यह सारा समय अब तक बेकार किया गया।

युवा क्रोध...नए नेतृत्व का वक्त
24 साल की मित्जी जोनल के अनुसार अधिकतर नेता हमारी पीढ़ी से केवल झूठ बोल रहे हैं। वे वित्तीय फायदों के आगे लोगों के जीवन को कुछ नहीं समझ रहे। कीनिया के 19 साल के एरिक जुगुना कहते हैं, "नेताओं के वादे गंभीर नजर ही नहीं आ रहे।" 24 साल की वेनेसा नकाटे के अनुसार, "नेताओं को उनके निर्णय के लिए जवाबदेह ठहराए बिना कोई दबाव नहीं बनाया जा सकता। अन्य कार्यकर्ता मानते हैं कि अब नए नेतृत्व यानी युवाओं को निर्णय लेने की जिम्मेदारी दी जाए।

बुजुर्ग वादे
70 साल के अमेरिकी जलवायु परिवर्तन मामलों के राजदूत जॉन कैरी दावा करते हैं कि कॉप्स में लिए निर्णय काफी प्रगतिशील हैं। उन्होंने अपने जीवन में ऐसी तेजी जलवायु परिवर्तन मामलों में नहीं देखी। वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय वार्ता जटिल मुद्दा है। वे देश, जिनका जलवायु परिवर्तन बढ़ाने में योगदान नहीं है, उन्हें भी दुष्परिणाम भोगने पड़ रहे हैं। इससे वे भी बहुत गुस्सा हैं। इसके बावजूद पहली बार उन्हें वित्तीय संसाधनों और प्रमुख नेताओं की गंभीर भागीदारी दिखी है।

परिणाम भी समझ रहे नेता
'हमारा भविष्य मत बिगाड़ो' जैसे नारों के साथ विश्व के प्रमुख नेताओं को आगाह कर रहे युवा कार्यकर्ताओं के गुस्से को कई नेता गंभीरता से समझने लगे हैं। उन्हें पता है कि देश लौट कर उन्हें इन्हीं युवा वोटरों को जवाब देना है। इसका उदाहरण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ पर दिए वक्तव्य में देखा जा सकता है जहां उन्होंने स्वीकारा, 'हमें आज के कार्यकर्ताओं के मुकाबले भविष्य के कार्यकर्ता कहीं ज्यादा कड़वाहट और क्रोध से देखेंगे।'

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