साल 1961-1990 के दशकों के मुकाबले 2011-20 के दशक में दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका, मैक्सिको और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में बेहद गर्म दिनों की संख्या दोगुनी हो गई है।
मंगलवार को दुबई में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में वर्ल्ड मेटेरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) की रिपोर्ट जारी की गई। इस रिपोर्ट में जो आंकड़े दिए गए हैं, वो डराने वाले हैं। दरअसल इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के चलते भारत में बीते दशक में औसत से ज्यादा गर्मी बढ़ी है और साथ ही बारिश भी ज्यादा हुई है। साल 2011-20 के दशक को भारत के लिए सबसे ज्यादा गर्म दशक बताया गया है।
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भीषण गर्मी के दिन बढ़े
बता दें कि डब्लूएमओ, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है, जो मौसम, जलवायु और जल संसाधन का अध्ययन करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011-20 का दशक उत्तर पश्चिमी भारत, पाकिस्तान, चीन और अरब पेनिन्सुला के दक्षिणी तट के इलाके के लिए सबसे गर्म रहा है। साल 1961-1990 के दशकों के मुकाबले 2011-20 के दशक में दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप, दक्षिणी अफ्रीका, मैक्सिको और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में बेहद गर्म दिनों की संख्या दोगुनी हो गई है। वहीं ठंडे दिनों की संख्या लगातार कम हो रही है। पिछले दशक में 1961-1990 के दशकों की तुलना में ठंडे दिन 40 फीसदी कम हो गए हैं।
भारी बारिश के चलते बाढ़ की समस्या बढ़ी
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में बाढ़ की समस्या भी बढ़ गई है। जून 2013 में भारी बारिश, पहाड़ों की बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिनमें 5800 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। केरल में 2018, 2019 और 2020 में भयंकर बाढ़ आई है। इससे भारत और पड़ोसी देशों में 2000 से ज्यादा मौतें हुई हैं। जलवायु परिवर्तन से ना सिर्फ बारिश बढ़ी है बल्कि कई जगहों पर भयंकर सूखा भी पड़ा है, इससे कृषि प्रभावित हुई है। साथ ही पीने के पानी की भी समस्या बढ़ी है।
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लोगों की जेब पर बढ़ रहा बोझ
डब्लूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, अंटार्कटिका में बर्फ की परत में 75 प्रतिशत की कमी आई है। ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र स्तर बढ़ रहा है और समुद्र की सतह गर्म होने से चक्रवाती तूफान की घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्लेशियरों के पिघलने की गति एक पीढ़ी से भी कम समय में बढ़कर दोगुनी हो गई है। जलवायु परिवर्तन का असर लोगों की जेब पर भी बढ़ रहा है। दरअसल बढ़ती गर्मी से जीवनयापन का खर्च बढ़ता जा रहा है।