पीपुल्स नेशनल कांग्रेस के मुइज्जू मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के करीबी सहयोगी हैं। यामीन 2013 से 2018 तक देश के राष्ट्रपति रहे थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने चीन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए थे। मुइज्जू ने शनिवार को हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव में निवर्तमान राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को हराया। सोलिह के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ मालदीव के मित्रवत संबंध रहे हैं। यामीन अभी भ्रष्टाचार के मामले में 11 साल जेल की सजा काट रहे हैं।
शी ने अपने संदेश में कहा कि चीन और मालदीव के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान का लंबा इतिहास रहा है। चीनी राष्ट्रपति ने साल 2014 में मालदीव का दौरा किया था और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत कई चीनी निवेशों की घोषणा की थी। शी ने अपने संदेश में आगे कहा, दोनों देश न केवल आपसी भरोसे और सहयोग के मित्र हैं, बल्कि साझा विकास और समृद्धि के भी साझेदार हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों के विकास को बहुत महत्व देते हैं और पारंपरिक मित्रता को आगे बढ़ाने, व्यापारिक सहयोग को गहरा करने और दोनों देशों के बीच भविष्योन्मुखी, मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए नवनिर्वाचित राष्ट्रपति के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।
मुइज्जू की जीत से चीन को उम्मीद है कि वह भारत के दक्षिण तट के करीब हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से स्थित द्वीप समूह राज्य बीजिंग समर्थक नीतियों को आगे बढ़ाएगा। सोहिह ने इंडिया फर्स्ट की नीति अपनाई थी और नई दिल्ली के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किए थे।
मुइज्जू 17 नवंबर को पदभार संभालने वाले हैं। उम्मीद है कि उसके बाद ही वह अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे। सोलिह के कार्यकाल के दौरान भारत ने कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को शुरू करने के लिए मालदीव को आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके अलावा, भारत ने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष के रूप में चुनाव के लिए सक्रिय रूप से अभियान चलाया था। भारत ने कोविड संकट के दौरान मालदीव को वैक्सीन भी उपलब्ध कराई थी।