पिछले हफ्ते चीन में इंटरनेट की निगरानी करने वाली संस्था ने ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स को निर्देश दिया था कि वे बच्चों के लिए अनुचित कंटेंट हटा दें। इसके लिए अधिकारियों ने कुआईशाउ, टेन्सेंट के मैसेंजिंग एप क्यूक्यू, अलीबाबा ताओबाओ, वियेबो आदि को साइबर स्पेस एडमिन्स्ट्रेशन ऑफ चाइना के दफ्तर में बुलाया। उन्हें अपने फ्लैटफॉर्म से आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया।
पर्येवेक्षकों का कहना है कि चीन सरकार ने शक्तिशाली टेक कंपनियों की ताकत घटाने की मुहिम छेड़ी हुई है। वह ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर चैटिंग और मनोरंजन तक के क्षेत्र में कारबार करने वाली कंपनियों पर चाबुक चला रही है। इसके साथ ही अब ऐसा नियम बनाया जा रहा है, जिसके तहत अधिकारी किसी चीनी कंपनी को विदेशी स्टॉक एक्सचेंज में खुद को लिस्ट कराने से रोक देंगे। बताया जाता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग इंटरनेट कारोबार के बारे में खास मॉडल विकसित करने के प्रयास में जुटे हैं। इसका मकसद टेक कंपनियों के पास जमा धन को उन क्षेत्रों में निवेश करने के लिए मजबूर करना है, जो सरकार की प्राथमिकता है।
इस दिशा में चीन सरकार को सफलता भी मिली है। टेन्सेंट ने बीते मई में कहा था कि वह अपने मुनाफे के एक हिस्से का निवेश इस साल क्लाउड कंप्यूटिंग, गेम्स और वीडियो कंटेंट तैयार करने में करेगी। उसके बाद अलीबाबा और मेइतुआन ने भी ऐसे निवेश का इरादा जताया। कुछ कंपनियों ने शिक्षा, ग्रामीण विकास, और ग्रीन एनर्जी में निवेश की घोषणा की है। ये सारे क्षेत्र शी जिनपिंग सरकार की प्राथमिकता बताए जाते हैँ।