चीन सरकार ने प्रॉपर्टी सेक्टर पर जो कार्रवाई शुरू की है, उसका देश की कुल अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। ये चेतावनी चीन के अर्थशास्त्रियों ने दी है। चीन सरकार ने देश में स्थानीय प्रशासनों के ऊपर बढ़े कर्ज के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। इससे भी नुकसान पहुंचने की संभावना है।
बैंक ऑफ चाइना इंटरनेशनल के प्रमुख अर्थशास्त्री शु गाओ ने रविवार को एक पत्र जारी किया। उसमें उन्होंने कहा कि चीन सरकार ने स्थानीय प्रशासन के कर्ज लेने और रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ जो नए नियम लागू किए हैं, उससे मुमकिन है कि उनके हाथ में बिल्कुल नकदी न रहे। इससे आर्थिक विकास धीमी होने की समस्या और गंभीर रूप ले लेगी। शू ने कहा- ‘अर्थव्यवस्था में जो जोखिम मौजूद हैं, सरकार की यह कार्रवाई उनका समाधान नहीं है। बल्कि खतरा यह है कि इसकी वजह से चीनी अर्थव्यवस्था की खास ताकत खत्म हो जाए और आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन हाथ से चला जाए।’
चीन सरकार की कार्रवाइयों के कारण भूमि हस्तांतरण में पहले ही काफी गिरावट दर्ज हो चुकी है। इस साल के पहले नौ महीनों में इसमें 8.7 फीसदी की गिरावट आई। जबकि 2020 के जनवरी-फरवरी में इसमें 67.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी। जो रियल एस्टेट कंपनियां संकट में फंसी हैं, उनमें एवरग्रैंड प्रमुख है। उसके पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रेन जिपिंग ने पिछले हफ्ते एक टिप्पणी में लिखा है- ‘चीन की अर्थव्यवस्था को अभी भी एक निश्चित वृद्धि दर की जरूरत है।’ उन्होंने कहा था कि सरकार को नए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अधिक खर्च करना चाहिए।
चीन में एक महत्वपूर्ण आर्थिक बैठक अगले महीने होने की संभावना है। उसमें 2022 की अर्थनीति संबंधी प्राथमिकताओं को मंजूरी जाएगी। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उस बैठक से ठीक पहले अर्थशास्त्रियों ने उन मुद्दों पर बहस छेड़ी है, जो चीन सरकार की हालिया कार्रवाइयों से सामने आए हैं। अर्थशास्त्री इस बात से आशंकित हैं कि अभी जो आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट आई है, उससे चीन की आर्थिक सफलताओं की बुनियाद कमजोर हो सकती है।