वेबसाइट निक्कई एशिया के एक विश्लेषण के मुताबिक एपल कंपनी के सबसे बड़े 200 सप्लायरों में से 51 चीन के हैं। उनमें 48 ताइवान, 34 जापान और 32 अमेरिका के हैं। इसका मतलब हुआ कि क्वैलकॉम या एपल जैसी अमेरिकी कंपनियों को होने वाले मुनाफे में चीनी कंपनियों का बड़ा हाथ है। इसकी वजह चीनी कंपनियों का अलग नजरिया है। एपल कंपनी के एक सप्लाई चेन मैनेजर ने निक्कई एशिया से कहा- ‘ज्यादातर चीनी सप्लायर एक जैसे नजरिए से काम करते हैं। वे कम मुनाफे वाले कारोबार को स्वीकार करने को तैयार रहते हैं, जबकि दूसरे देश के सप्लायर ऐसा नहीं करते। चीनी सप्लायर एपल के साथ काम करते हुए अपनी भूमिका बढ़ाते हैं और अगली बार अधिक कारोबार की मांग करते हैं।’
अमेरिका में इन दिनों सेमीकंडक्टर उद्योग में अमेरिकी वर्चस्व बनाए रखने पर खास जोर दिया जा रहा है। ये राय जताई गई है कि सेमीकंडक्टर उद्योग में मजबूती बनाए रख कर ही अमेरिका वैश्विक कारोबार में अपनी बढ़त कायम रख सकता है। ऐसा करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन की मजबूती के लिए भी जरूरी है। अमेरिका सरकार ने अब सेमीकंडक्टर उद्योग में 50 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है। इसके जरिए उसका मकसद सेमीकंडक्टर उत्पादन की तकरीबन एक चौथाई क्षमता अमेरिका में रखना है।
अमेरिका ने सेमीकंडक्टर और दूसरे हाई टेक क्षेत्रों तक चीन की पहुंच रोकने के लिए कई उपाय किए हैं। इसी मकसद से हुवावे पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियां इस मामले में चीन की उपेक्षा करने को तैयार नहीं दिखती हैं। उनके कारोबारी संबंध चीनी कंपनियों के साथ पहले जैसे बने हुए हैं। इसी का संकेत स्मार्टफोन बाजार की ताजा सूरत है।